Aug 22, 2026 Login

त्योहारों से पहले महंगी हुई मिठासः 20 दिन में 20 रुपये तक बढ़ी चीनी की कीमत! 65 से 70 रुपये किलो पहुंची शक्कर, गुड़-मिश्री के दाम भी बढ़े! खड़गे ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

Sweets get costlier ahead of the festive season: Sugar prices have risen by up to ₹20 in just 20 days! Sugar has reached ₹65–₹70 per kg, and prices of jaggery and rock sugar have also gone up; Kharge

नई दिल्ली। सावन का पावन महीना चल रहा है और इसके साथ ही त्योहारों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। रक्षाबंधन, गणपति उत्सव, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, करवाचौथ और फिर दीपावली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। ऐसे समय में जब घरों में मिठाइयां और मीठे पकवान बनाने की तैयारियां शुरू होने वाली हैं, चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ दिनों में चीनी के दाम में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला है। कई बाजारों में जहां शक्कर करीब 45 रुपये किलो के आसपास मिल रही थी, वहीं अब इसकी कीमत 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है। कुछ शहरों में खुदरा कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। चीनी की कीमत में इस तेजी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारियों को भी हैरान कर दिया है। पिछले 15 से 20 दिनों में चीनी के दाम में करीब 17 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है। यानी कुछ ही दिनों में कीमत में करीब 40 फीसदी तक का उछाल आया है। इसका असर केवल चाय और दूध में इस्तेमाल होने वाली चीनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मिठाइयों, बेकरी उत्पादों, पेय पदार्थों और त्योहारों में बनने वाले तमाम मीठे पकवानों की कीमत पर भी पड़ सकता है। त्योहारों के मौसम में चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। घरों में मिठाइयां और पकवान बनाए जाते हैं, जबकि बाजार में भी मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। आम परिवारों के लिए रोजमर्रा की चाय से लेकर त्योहारों पर बनने वाली खीर, हलवा, लड्डू और अन्य मिठाइयों तक में चीनी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ना तय माना जा रहा है। इतना ही नहीं, चीनी के साथ गुड़ और मिश्री के दाम में भी तेजी आई है। बताया जा रहा है कि गुड़ और मिश्री की कीमतों में भी करीब 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। यानी मीठे का विकल्प चुनने वाले उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिल रही है।  चीनी की कीमतों में जिस तेजी से उछाल आया है, वह बाजार के जानकारों के लिए भी चिंता का विषय है। बताया जा रहा है कि महज 15 दिनों में चीनी के दाम करीब 17 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए। वहीं, बीते करीब 20 दिनों में यह बढ़ोतरी लगभग 20 रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। तीन महीने की अवधि देखें तो कई शहरों में चीनी की कीमत में करीब 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। खुदरा बाजार में 20 जुलाई को औसत कीमत करीब 48 रुपये प्रति किलो बताई गई थी, जो बढ़कर लगभग 56 रुपये प्रति किलो हो गई। कुछ बाजारों में इससे भी अधिक कीमत पर चीनी बिक रही है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक, एक्स-मिल कीमत में भी महज सात से दस दिनों के भीतर बड़ा बदलाव आया है। एक्स-मिल कीमत करीब 47-48 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

चीनी ही नहीं, गुड़-चावल और मक्के का आटा भी महंगा, खड़गे ने सरकार से पूछे तीन सवाल
महंगाई का असर केवल चीनी तक सीमित नहीं है। पिछले तीन महीनों के दौरान गुड़ की कीमत में करीब 24 प्रतिशत तक की वृद्धि बताई गई है। इसी अवधि में चावल करीब 16 प्रतिशत और मक्के का आटा करीब 11 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। इसका मतलब है कि आम उपभोक्ता को रोजमर्रा की रसोई से लेकर त्योहारों की तैयारी तक कई मोर्चों पर बढ़ी कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाई और खाद्य उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों की लागत भी बढ़ेगी। इसका असर आगे चलकर तैयार उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है। चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चीनी की कीमत और उपलब्ध स्टॉक को लेकर सरकार से तीन सवाल किए। खड़गे ने सवाल उठाया कि यदि भारत चीनी उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर है तो फिर विदेश से चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने एथेनॉल नीति को लेकर भी सरकार से सवाल किया और पूछा कि एक तरफ घरेलू बाजार में चीनी महंगी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ गन्ने से एथेनॉल बनाने के लिए उसका इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस ने इसे सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं।

सरकार ने कहा- एथेनॉल की वजह से नहीं बढ़े चीनी के दाम
वहीं, केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि चीनी की कीमतों में वृद्धि के पीछे कई दूसरे कारण हैं। सरकार के मुताबिक, घरेलू चीनी उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई से जुड़े दबाव कीमतों में तेजी की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। सरकार का कहना है कि एथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी की हिस्सेदारी भी पहले के मुकाबले कम हुई है। 2022-23 में एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गई है। खाद्य सचिव के मुताबिक, देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही शुगर से आता है। बाकी एथेनॉल मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनाया जाता है। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए करीब 28 लाख टन चीनी डायवर्ट की गई है। सरकार का तर्क है कि इसे चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी का अकेला कारण नहीं माना जा सकता। हालांकि, ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक पिछले वर्ष करीब 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ था। इसमें बड़ी मात्रा में अनाज और चीनी बनाने योग्य गन्ने से प्राप्त शीरे का इस्तेमाल हुआ। संगठन ने यह भी कहा कि खराब अनाज की उपलब्धता कम होने से पशु आहार और पोल्ट्री फीड की कीमतों पर भी असर पड़ा है।

नौ साल बाद फिर विदेश से चीनी मंगाने की नौबत
भारत दुनिया में ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड करीब 1.1 करोड़ टन चीनी का निर्यात किया था। इसके बाद चीनी निर्यात में लगातार कमी आई। घरेलू बाजार में आपूर्ति का संकट होने पर सरकार कच्ची चीनी का आयात कर उसे घरेलू मिलों में रिफाइन कराकर बाजार में उतारती है। इससे पहले 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। अब करीब नौ साल बाद एक बार फिर विदेश से कच्ची चीनी मंगाने की जरूरत पड़ी है। केंद्र सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर यानी कच्ची चीनी को बिना ड्यूटी आयात करने की मंजूरी दी है।

गन्ने की फसल प्रभावित होने से घटा चीनी उत्पादन
चीनी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह इस सीजन में उत्पादन में आई कमी भी मानी जा रही है। 2025-26 में देश में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख टन का था। रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ ज्यादा बारिश से गन्ने की फसल प्रभावित हुई। इसका सीधा असर चीनी उत्पादन पर पड़ा और मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक भी कम हुआ। पिछले सीजन में पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक था। इस बार यह घटकर लगभग 32 लाख टन रह गया है। स्टॉक में इस कमी ने बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार के अनुमान के मुताबिक सितंबर 2026 के अंत तक करीब 33 से 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बचा रह सकता है। सरकार का दावा है कि यह घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त होगा। साथ ही विदेश से आयात की जा रही कच्ची चीनी को रिफाइन कर बाजार में उतारने से उपलब्धता और बढ़ेगी।