ऊर्जा और अर्थव्यवस्था पर 'महासंग्राम': पीएम मोदी की बचत की अपील पर कांग्रेस का पलटवार, कहा- महंगाई का नया बहाना

'Epic Battle' over Energy and Economy: Congress Hits Back at PM Modi's Appeal for Savings—Calls It a "New Excuse for Inflation"

नई दिल्ली। देश में ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई के बीच राजनीति गरमा गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 घंटे के भीतर दूसरी बार देशवासियों से ऊर्जा बचाने और सोने की खरीद टालने की अपील किए जाने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर प्रधानमंत्री इसे राष्ट्रहित में उठाया गया कदम बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे आगामी आर्थिक संकट और महंगाई को छिपाने की एक 'भूमिका' करार दे रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नागरिकों से कड़े संयम बरतने का आग्रह किया है। पीएम ने कहा, "मैं प्रत्येक नागरिक से अपील करता हूँ कि वे पेट्रोल-डीजल का उपयोग यथासंभव कम करें। सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता दें।" प्रधानमंत्री ने केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए भी एक बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि देश के धन का एक बड़ा हिस्सा सोने के आयात पर खर्च होता है, इसलिए जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, देशवासी सोने की खरीद को स्थगित कर दें। उन्होंने 'लोकल फॉर वोकल' को जन आंदोलन बनाने पर जोर देते हुए विदेशी वस्तुओं के बजाय स्थानीय उत्पादों को अपनाने की वकालत की। प्रधानमंत्री ने तकनीक के उपयोग को ऊर्जा बचाने का सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों से अपील की है कि जहाँ संभव हो, 'वर्क फ्रॉम होम' और वर्चुअल मीटिंग को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, निजी कार मालिकों को 'कारपूलिंग' को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है ताकि एक ही वाहन में अधिक से अधिक लोग सफर कर सकें और ईंधन की खपत कम हो। प्रधानमंत्री की इस अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता तारीक अनवर ने सरकार को आड़े हाथों लिया। अनवर ने कहा कि जब पांच राज्यों में चुनाव चल रहे थे, तब विपक्ष ने पहले ही आशंका जताई थी कि सरकार चुनाव खत्म होते ही महंगाई बढ़ाएगी। उन्होंने कहा, "सरकार अब ऐसी अपीलें करके असल में महंगाई बढ़ाने की भूमिका तैयार कर रही है। जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब सरकार ने कहा था कि हमारे पास पर्याप्त भंडार है और कोई संकट नहीं है, जबकि राहुल गांधी लगातार आगाह कर रहे थे कि आने वाले दिनों में बड़ा संकट पैदा होगा। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या सरकार अपनी विफलताओं को ढंकने के लिए जनता से त्याग करने की उम्मीद कर रही है। अनवर के अनुसार, यह अपील जनता को मानसिक रूप से आने वाली बड़ी महंगाई के लिए तैयार करने की एक सोची-समझी रणनीति है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह अपील दोतरफा संकेत दे रही है। एक तरफ यह वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान है, तो दूसरी तरफ यह विदेशी मुद्रा भंडार और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों से निपटने की सरकार की बेचैनी को भी दर्शाता है।