बड़ी खबरः उत्तराखंड भाजपा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव! सालों तक संगठन की कमान संभालने वाले अजेय कुमार की विदाई! अब संभालेंगे राजस्थान की कमान
देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए उत्तराखंड भाजपा के संगठन महामंत्री अजेय कुमार को राजस्थान का नया प्रदेश संगठन महामंत्री नियुक्त किया है। भाजपा नेतृत्व के इस महत्वपूर्ण फैसले को आगामी चुनावी रणनीति और संगठन विस्तार की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे बदलावों के क्रम में यह नियुक्ति विशेष महत्व रखती है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में अजेय कुमार को राजस्थान भाजपा का संगठन महामंत्री नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई है। आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है।
छह वर्षों तक उत्तराखंड भाजपा संगठन की धुरी रहे अजेय कुमार
अजेय कुमार वर्ष 2019 से उत्तराखंड भाजपा के संगठन महामंत्री के रूप में कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने और चुनावी रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संगठन में उनकी पहचान एक ऐसे रणनीतिकार के रूप में रही, जो पर्दे के पीछे रहकर भी चुनावी प्रबंधन और संगठन विस्तार में निर्णायक भूमिका निभाते रहे। उनके कार्यकाल के दौरान भाजपा ने उत्तराखंड की राजनीति में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य के इतिहास में पहली बार लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर एक नया राजनीतिक इतिहास रचा। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने प्रदेश की सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर अपना राजनीतिक वर्चस्व कायम रखा। अजेय कुमार की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता संगठन को जमीनी स्तर तक सक्रिय बनाए रखना रही। बूथ प्रबंधन, पन्ना प्रमुख व्यवस्था, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करने में उनकी भूमिका को भाजपा के भीतर काफी सराहा गया। यही कारण रहा कि वे लंबे समय तक उत्तराखंड भाजपा संगठन के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले अजेय कुमार को संगठनात्मक कार्यों का व्यापक अनुभव है। पार्टी नेतृत्व ने इसी अनुभव को देखते हुए अब उन्हें राजस्थान जैसे बड़े और राजनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है।
राजनीतिक सफलताओं के साथ विवादों के दौर भी देखे
अजेय कुमार का कार्यकाल केवल राजनीतिक सफलताओं तक सीमित नहीं रहा। इसी दौरान उत्तराखंड का चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड भी सामने आया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस मामले को लेकर समय-समय पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी हुए और विपक्ष ने भाजपा संगठन को निशाने पर लिया। अंकिता भंडारी की मां तथा कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से विभिन्न मांगें और आरोप उठाए गए थे। हालांकि जांच एजेंसियों अथवा किसी न्यायिक प्रक्रिया में अजेय कुमार के खिलाफ कोई प्रमाणित निष्कर्ष या कानूनी पुष्टि सामने नहीं आई। इसके बावजूद यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक बहस का विषय बना रहा।
विवादों के बावजूद बना रहा नेतृत्व का भरोसा
राजनीतिक विवादों और विपक्षी हमलों के बावजूद भाजपा संगठन के भीतर अजेय कुमार की स्थिति मजबूत बनी रही। पार्टी नेतृत्व लगातार उन पर भरोसा जताता रहा और चुनावी मोर्चों पर उनकी रणनीतियों का असर भी दिखाई देता रहा। यही वजह है कि संगठन के भीतर उन्हें एक भरोसेमंद और परिणाम देने वाले संगठनकर्ता के रूप में देखा जाता है।