Oct 29, 2026 Login
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उत्तराखंड में कांग्रेस का सियासी शंखनादः दिवाली बाद देवभूमि में गरजेंगे राहुल और प्रियंका गांधी! अंकिता भंडारी केस, भू-कानून और पलायन पर सरकार को घेरने की तैयारी

Congress’s political clarion call in Uttarakhand: Rahul and Priyanka Gandhi to roar in the ‘Land of Gods’ (Devbhoomi) after Diwali! Plans afoot to corner the government over the Ankita Bhandari case,

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गयी हैं। इसी क्रम में कांग्रेस ने भी तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी हैं। पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा जल्द ही उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में विशाल जनसभाओं को संबोधित करेंगे। दिवाली के बाद प्रस्तावित इन रैलियों के जरिए कांग्रेस राज्य सरकार को प्रमुख जनमुद्दों पर घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार, दोनों नेताओं की जनसभाओं की अंतिम तिथियां 1 नवंबर को नई दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ होने वाली बैठक में तय की जाएंगी। संगठन सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी नवंबर के अंतिम सप्ताह में पौड़ी में एक बड़ी रैली को संबोधित कर सकती हैं। पहले उनका कार्यक्रम गौचर में प्रस्तावित था, लेकिन रणनीतिक रूप से इसे अब पौड़ी में आयोजित करने की योजना है। इस रैली का मुख्य केंद्र चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड, महिला सुरक्षा, पलायन और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दे होंगे। चर्चा यह भी है कि दौरे के दौरान प्रियंका गांधी अंकिता भंडारी के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त कर सकती हैं। वहीं, राहुल गांधी दिसंबर के पहले सप्ताह में सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला पहुंच सकते हैं। चीन सीमा से सटे इस सामरिक क्षेत्र में राहुल गांधी की जनसभा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस इस मंच से राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याएं, स्थानीय विकास और रोजगार जैसे मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाने की तैयारी में है। इसके अलावा प्रदेश में लंबे समय से उठ रही मूल निवास और सख्त भू-कानून की मांग भी इन रैलियों के मुख्य एजेंडे में शामिल रहेगी। कांग्रेस के प्रदेश संगठन महासचिव राजेंद्र भंडारी ने स्पष्ट किया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेताओं के दौरे पहले से प्रस्तावित थे, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर जारी व्यस्तताओं के चलते तिथियों में आंशिक बदलाव हुआ है।