Oct 28, 2026 Login
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उत्तराखण्डः पीएम आवास योजना में जियोटैगिंग आंकड़ों में विरोधाभास का मामला पहुंचा हाईकोर्ट! टर्मिनेशन आदेश पर शहरी विकास निदेशक से जवाब तलब, लिंक में जानें क्या है पूरा मामला

Uttarakhand: Case of discrepancies in geotagging data under the PM Awas Yojana reaches the High Court! Court seeks a response from the Director of Urban Development regarding termination orders; clic

नैनीताल। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की जियोटैगिंग और कार्यों की प्रगति के आंकड़ों में विरोधाभास का मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। संविदा कर्मी विस्तार गुप्ता ने अपने टर्मिनेशन आदेश को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें महज दो मकान पूरे करने के आधार पर नौकरी से हटा दिया गया, जबकि भारत सरकार के पोर्टल पर उनके कार्यकाल में 67 से 70 प्रतिशत तक काम पूरा होने के आंकड़े दर्ज हैं। मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शहरी विकास निदेशक से जवाब तलब किया है। साथ ही, अगली सुनवाई तक संबंधित पद पर किसी अन्य कर्मचारी को नियुक्त कर विस्तार गुप्ता की जगह भरने पर रोक लगाई है।मामले की सुनवाई के दौरान शहरी विकास निदेशक विनोद गोस्वामी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि विस्तार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई सीडीओ पौड़ी अथवा संबंधित अधिकारी से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। हालांकि, पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और विभागीय रिपोर्ट के बीच अंतर को लेकर अदालत ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की जियोटैगिंग और कार्यों की निगरानी से जुड़ा है। विस्तार गुप्ता वर्ष 2019 से उत्तराखंड शहरी विकास निदेशालय के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत थे। उनकी जिम्मेदारी योजना के तहत पूर्ण हुए मकानों का रिकॉर्ड रखना, जियोटैगिंग करना और अपात्र लोगों को गलत तरीके से लाभ दिए जाने की स्थिति में संबंधित अनियमितताओं को सामने लाना था। इससे पहले वह खटीमा नगर पालिका के साथ भी काम कर चुके थे। रुड़की नगर निगम में कामकाज के दौरान विस्तार गुप्ता ने कई अनियमितताएं पाईं और इसकी शिकायत की। आरोप है कि शिकायत के बाद उन्हें ही नौकरी से हटा दिया गया। 17 मार्च 2026 को जारी टर्मिनेशन आदेश में उनके खिलाफ यह आरोप लगाया गया कि निर्धारित 100 मकानों में से उन्होंने केवल दो मकानों का काम पूरा किया। विस्तार गुप्ता ने इस आंकड़े पर सवाल उठाते हुए अदालत को बताया कि भारत सरकार के पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उनके कार्यकाल में 67 से 70 प्रतिशत तक काम पूरा हुआ था। ऐसे में विभागीय रिपोर्ट में केवल दो मकानों का काम पूरा होने का आंकड़ा किस आधार पर दर्ज किया गया।