Oct 29, 2026 Login
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श्रीनगर-देवप्रयाग हाईवे पर सीएम धामी का औचक निरीक्षण: पहाड़ी के उपचारात्मक कार्यों का लिया जायजा, गुणवत्ता और समयबद्धता पर दिया जोर

CM Dhami conducts a surprise inspection of the Srinagar-Devprayag highway; reviews slope stabilization works, emphasizing quality and adherence to timelines.

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने औचक निरीक्षणों और जमीनी सक्रियता के लिए एक बार फिर चर्चा में हैं। गैरसैंण में संपन्न हुए विधानसभा सत्र के बाद देहरादून लौटते समय मुख्यमंत्री ने श्रीनगर-देवप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग का रुख किया और वहां चल रहे पहाड़ी के उपचारात्मक (रेमेडियल) कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और यातायात को सुगम बनाने के प्रति सरकार की गंभीरता इस औचक निरीक्षण में साफ तौर पर झलकी।

प्रदेश में पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए चल रहे कार्यों की गुणवत्ता परखने के क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीनगर-देवप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहाड़ी के उपचारात्मक कार्यों का निरीक्षण किया। गैरसैंण में विधानसभा सत्र के बाद देहरादून लौटते समय मुख्यमंत्री मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित इंजीनियरों से कार्यों की मौजूदा स्थिति, तकनीकी पहलुओं और आगे की कार्ययोजना के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और सभी काम निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाने चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्थानीय लोगों की दैनिक जरूरतों, पर्यटन गतिविधियों और आर्थिक विकास की जीवनरेखा भी हैं। ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्गों पर संवेदनशील स्थलों का उपचार और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए और उपचारात्मक उपाय इस तरह किए जाएं कि उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहे। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल उसके पूरा हो जाने से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, उपयोगिता और टिकाऊपन से तय होती है। उन्होंने संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को आपसी समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उपचारात्मक कार्यों में आवश्यक तकनीकी सावधानियां बरती जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखने और निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार निर्माण पूरा कराने को कहा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही आमजन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री धामी ने निरीक्षण के दौरान मौके पर काम कर रहे इंजीनियरों और श्रमिकों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने आधारभूत ढांचे के निर्माण और सुधार में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और श्रमिकों के समर्पण तथा परिश्रम से ही विकास परियोजनाएं धरातल पर आकार लेती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी दक्षता और जिम्मेदारी के साथ काम करना जरूरी है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने इंजीनियरों और श्रमिकों के साथ तस्वीर भी खिंचवाई। निरीक्षण के दौरान उनका जोर निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति समझने और निर्धारित मानकों के अनुरूप काम सुनिश्चित करने पर रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में सड़क नेटवर्क का सीधा संबंध पर्यटन, स्थानीय व्यापार और दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी से है। सुरक्षित सड़कें न केवल लोगों की आवाजाही आसान बनाती हैं, बल्कि पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा देती हैं। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क मार्गों की स्थिति आमजन के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क सुधार और पहाड़ी उपचार के कार्यों की नियमित निगरानी की जाए तथा कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने के साथ उनकी गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए। सरकार की प्राथमिकता सड़कों को सुरक्षित, सुगम और टिकाऊ बनाना है, ताकि यात्रियों तथा स्थानीय लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री का यह निरीक्षण ऐसे समय महत्वपूर्ण है, जब पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और संवेदनशील स्थलों के स्थायी उपचार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बनी रहती है। हालांकि, निरीक्षण के दौरान उपचारात्मक कार्यों की लागत, परियोजना की अंतिम समयसीमा और अब तक पूरी हुई प्रगति के विस्तृत आंकड़े साझा नहीं किए गए। ऐसे में इन कार्यों की प्रभावशीलता का आकलन पूरा होने और उनकी तकनीकी समीक्षा के बाद ही किया जा सकेगा।