बड़ी खबरः नैनीताल के आसपास गांवों में दूषित पेयजल से हड़कंप! बीमारियों की चपेट में आए लोग, ज्यूलिकोट क्षेत्र के 5 स्कूलों में 1 से 3 सितंबर तक छुट्टी
नैनीताल। नैनीताल से सटे गांवों में दूषित पेयजल का संकट अब गंभीर होता जा रहा है। पहले कुछ गांवों में पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियां फैलने के बाद अब आसपास के कई अन्य गांव भी इसकी चपेट में आ गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ रहे हैं और कई मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं, जल संस्थान ने पेयजल और सीवर लाइनों को अलग करने के साथ ही पानी की टंकियों में क्लोरीन डालने का काम शुरू कर दिया है। जनहित और छात्रहित को देखते हुए ज्यूलिकोट क्षेत्र के पांच सरकारी और निजी स्कूलों में आज एक से तीन सितंबर तक अवकाश घोषित किया गया है। नैनीताल के तल्लीताल से लगे कृष्णापुर और दुर्गापुर के अलावा वीरभट्टी, गांजा, छिंडां मल्ला, बगरीखोड़ और छिंडां तल्ला समेत कई गांवों में दूषित पेयजल की समस्या सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग पेट संबंधी बीमारियों की चपेट में हैं। पानी की गुणवत्ता की जांच के दौरान जल संस्थान को पेयजल में सीवेज के मिश्रण की शिकायत मिली। इसके बाद विभाग ने पेयजल और सीवर लाइनों को चेक कर उन्हें अलग करने का काम शुरू किया। पानी की टंकियों की सफाई के साथ उनमें क्लोरीन डाला गया। इधर, ज्यूलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में लगातार लोगों के बीमार पड़ने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया। ग्रामीणों ने आज नैनीताल-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि ज्यूलिकोट के अलावा वर्गोंमोंट, गांजा, छीड़ा, वीरभट्टी, कृष्णापुर, साड़ियाताल, तल्ला बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान और देवलडूंगा समेत कई क्षेत्रों में दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है। उनके मुताबिक, दूषित पानी पीने से पीलिया, टाइफाइड, डायरिया, उल्टी, बुखार और दस्त जैसी बीमारियां सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि ज्यादातर क्षेत्रों में पानी की सप्लाई दुर्गापुर जल स्रोत से होती है और इसके पास सीवर टैंक की लीकेज के कारण पानी दूषित होने की आशंका है। ग्रामीणों के मुताबिक, सोमवार को गांजा स्थित पीएचसी सेंटर में पेट संबंधी बीमारी को लेकर करीब 110 लोगों ने जांच कराई। धरने में बीटीसी सदस्य हिमांशु पांडे, मनोज चनियाल समेत क्षेत्र के कई ग्रामीण मौजूद रहे।
