उत्तराखण्डः 2003 हल्द्वानी हत्या-लूट मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! चारों आरोपी बरी, अदालत ने पूछा- लूट हुई तो रकम की बरामदगी कहां है?
नैनीताल। वर्ष 2003 में हल्द्वानी में हत्या और लूट के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने चार आरोपियों को बरी कर दिया है। निचली अदालत ने इस मामले में दो आरोपियों को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि एक आरोपी को चोरी का सामान रखने के मामले में सजा मिली थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज गया। दोबारा सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ती रविंद्र मैठानी और न्यायमूर्ती सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने पुलिस की जांच और अभियोजन की कहानी का बारीकी से परीक्षण किया। अदालत ने सबसे अहम सवाल यह उठाया कि अगर अनिल और इमरान ने 47 हजार 500 रुपये की रकम लूटने के लिए हत्या की थी, तो वह रकम आखिर बरामद कहां हुई? दोनों आरोपियों के पास से इस रकम की कोई रिकवरी नहीं हुई। बता दें कि वर्ष 2003 में हल्द्वानी में मुरादाबाद कैसेट व्यापारी के नौकर राज की हत्या कर दी गईं थी। जिसका शव कैनाल में मिला। जबकि उसके साथी को घायल कर 47 हजार 500 की रकम और कैसेट भी लूट लिए गए। मामले के मुख्य गवाह ने दावा किया था कि उसे भी नहर में डाल दिया गया था। उसका कहना था कि जब अनिल उसकी गर्दन पर चाकू से वार करने वाला था, तभी उसे होश आया और वह चिल्लाने लगा। इसी दौरान मौके पर पहुंचे पुलिस कांस्टेबल कनई सिंह ने उसे नहर से बाहर निकाला। कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ तो दुकानदार अनिल, इमरान, वासिब और पप्पू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। मामला कोर्ट पहुंचा तो जिला अदालत ने 2 आरोपी यानि अनिल और इमरान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, तो वासिब और पप्पू को एक साल की सजा सुनाई। आरोपियों द्वारा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की तो 2013 में हाईकोर्ट ने सभी को बरी कर दिया, लेकिन सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सुप्रीम कोर्ट ने दुबारा मामला हाईकोर्ट भेज दिया। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद फिर हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।