Aug 31, 2026 Login

उत्तराखण्डः पौड़ी में छात्रा की मौत के बाद विश्वविद्यालय में भड़का आक्रोश! साथी छात्रों ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप, मेडिकल और एंबुलेंस व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल

Uttarakhand: Outrage erupts at the university following the death of a female student in Pauri! Fellow students level serious allegations against the management and raise major questions regarding me

पौड़ी गढ़वाल। पौड़ी गढ़वाल के भरसार स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में बीएससी हॉर्टिकल्चर चतुर्थ वर्ष की छात्रा मधु यादव की इलाज के दौरान मौत के बाद विश्वविद्यालय परिसर में आक्रोश फैल गया। छात्रा की मौत ऋषिकेश में उपचार के दौरान हुई। घटना से आक्रोशित साथी छात्राओं ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में विरोध जताते हुए प्रशासन की चिकित्सा और एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। छात्राओं ने आरोप लगाया कि मधु की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे समय पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सहयोग नहीं मिल सका। छात्राओं के मुताबिक मधु यादव मूल रूप से पंतनगर की रहने वाली थी और बीएससी हॉर्टिकल्चर चतुर्थ वर्ष में अध्ययनरत थी। शनिवार रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। छात्राओं के अनुसार उसे सर्दी और बुखार की शिकायत थी, लेकिन बाद में उसकी स्थिति गंभीर होती चली गई। साथी छात्राओं ने परिसर में उपलब्ध मेडिकल सुविधा के माध्यम से उसका उपचार कराने का प्रयास किया। छात्राओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध चिकित्सा व्यवस्था उसकी स्थिति के अनुरूप पर्याप्त नहीं थी। छात्राओं के अनुसार तबीयत बिगड़ने के बाद मधु को विश्वविद्यालय की एंबुलेंस से पाबौ अस्पताल ले जाया गया। यहां पहुंचने के बाद छात्राओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की ओर से अपनी एंबुलेंस उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद सरकारी एंबुलेंस की मदद से छात्रा को पौड़ी अस्पताल ले जाया गया। पौड़ी में चिकित्सकों ने छात्रा का उपचार किया, लेकिन उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे श्रीनगर स्थित हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। छात्राओं के मुताबिक श्रीनगर में भी मधु की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद रविवार को उसे ऋषिकेश ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मधु की मौत की खबर विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचते ही साथी छात्राओं में शोक के साथ आक्रोश फैल गया। सोमवार को छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। छात्राओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन करते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ, जरूरी संसाधन और तत्काल उपचार की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। छात्राओं का कहना है कि मधु की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने अपनी ओर से हरसंभव मदद करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। छात्रा रिधम ने आरोप लगाया कि मधु की तबीयत खराब होने के बाद छात्राओं ने हर संभव मदद करने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनके अनुसार एंबुलेंस उपलब्ध कराने में भी परेशानी हुई और छात्राओं को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक मरीज को ले जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। छात्राओं ने सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय में पर्याप्त मेडिकल सुविधा और आपातकालीन व्यवस्था मौजूद होती तो छात्रा को शुरुआती स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल सकता था। हालांकि, छात्रा की मौत और उपचार में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच का विषय है।

वार्डन के व्यवहार पर भी उठाए सवाल
विरोध कर रही छात्राओं ने विश्वविद्यालय की वार्डन की कार्यप्रणाली और व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। छात्राओं का आरोप है कि मुश्किल समय में उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और उनके साथ उचित व्यवहार भी नहीं किया गया। छात्राओं का कहना है कि जब किसी छात्रा की तबीयत गंभीर हो जाए तो विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए। छात्राओं ने मांग की कि मधु की मौत के पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि उसे समय पर उपचार उपलब्ध कराने में कहीं कोई कमी तो नहीं हुई। छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में मेडिकल सुविधा को मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए परिसर में पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ और आपातकालीन संसाधन उपलब्ध होने चाहिए। इसके अलावा एंबुलेंस की उपलब्धता भी चौबीसों घंटे सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि गंभीर स्थिति में मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल या हायर सेंटर तक पहुंचाया जा सके।