बड़ी खबरः विरोध प्रदर्शन के बीच CJP का बड़ा दावा! सरकार ने संपर्क किया, हम जेपी नड्डा से मिलने जा रहे हैं! अभिजीत दीपके ने तोड़ा अनशन, खड़गे ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

Big News: CJP makes a major claim amidst protests! The government has reached out; we are going to meet JP Nadda! Abhijit Deepke has ended his hunger strike, and Kharge has raised the issue in the Ra

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और देश में बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन सोमवार को एक नए मोड़ पर पहुंच गया। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जहां हजारों छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और युवा जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर 'चलो संसद' मार्च की तैयारी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार और आंदोलनकारी संगठन के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। इसी बीच CJP ने सरकार के साथ वार्ता को देखते हुए संसद मार्च को फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित करने की घोषणा कर दी। कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर से जानकारी देते हुए कहा कि सरकार की ओर से सोमवार सुबह बातचीत के लिए संपर्क किया गया। इसके बाद वह और संगठन के वरिष्ठ नेता आशुतोष रांका सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात के लिए रवाना हुए। सौरव दास ने कहा, "सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया है। हमारी मांगें पूरी तरह स्पष्ट हैं। देशभर से बड़ी संख्या में युवा यहां पहुंचे हैं। हमें विश्वास है कि छात्रों और युवाओं की आवाज सुनी जाएगी और हम अपनी लड़ाई जीतेंगे।" प्रतिनिधिमंडल के सरकार से बातचीत के लिए रवाना होने के बाद CJP नेतृत्व ने ऐलान किया कि फिलहाल संसद मार्च को रोका जा रहा है। पार्टी ने कहा कि वार्ता के नतीजे आने तक आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

सोनम वांगचुक की अपील पर अभिजीत दीपके ने तोड़ा अनशन
आंदोलन के बीच सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब सामने आया जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। दीपके ने यह फैसला सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील पर लिया। वांगचुक को शनिवार को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद अभिजीत दीपके ने उनके समर्थन में आमरण अनशन शुरू किया था। सोमवार को जंतर-मंतर स्थित आंदोलन स्थल पर वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने मंच से बताया कि सोनम वांगचुक ने अस्पताल से संदेश भेजकर दीपके से आग्रह किया है कि वह अपना अनशन समाप्त करें और आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अपनी ऊर्जा बचाकर रखें। इसके बाद अभिजीत दीपके ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रों की प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती।

सोनम वांगचुक ने रखीं अनशन समाप्त करने की तीन शर्तें
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने समर्थकों के नाम लिखे संदेश में स्पष्ट किया कि वह किन परिस्थितियों में अपना अनशन समाप्त करेंगे। वांगचुक ने कहा कि यदि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में सामने आई गंभीर विफलताओं, विशेषकर पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, या फिर CJP का प्रतिनिधिमंडल संसद पहुंचकर सांसदों से यह आश्वासन प्राप्त कर लेता है कि इस पूरे मुद्दे पर संसद के भीतर गंभीर चर्चा कराई जाएगी, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों से वह अस्पताल से बाहर नहीं आ सकते, तो सांसद स्वयं अस्पताल आकर यह भरोसा दे सकते हैं कि छात्रों के मुद्दे संसद में मजबूती से उठाए जाएंगे।

जंतर-मंतर पर जारी है आंदोलन
सरकार के साथ बातचीत शुरू होने के बावजूद जंतर-मंतर पर आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। हजारों छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और विभिन्न राज्यों से पहुंचे युवा अभी भी धरना स्थल पर मौजूद हैं। आंदोलनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि नीट पेपर लीक सहित सभी भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लाखों छात्र पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय बल प्रयोग कर रही है। खड़गे ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करा रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।