ऊधम सिंह नगरः केलाखेड़ा नगर पंचायत में पर्यावरण मित्र पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे नियुक्ति पाने का आरोप! एफआईआर दर्ज कर तत्काल बर्खास्तगी की मांग, डीएम से मिला शिष्टमण्डल

Udham Singh Nagar: Allegations have surfaced that an 'Environment Mitra' (sanitation worker) in the Kelakheda Nagar Panchayat secured the appointment using forged documents. A delegation met the Dist

रुद्रपुर/केलाखेड़ा। उधम सिंह नगर जिले की नगर पंचायत केलाखेड़ा में पर्यावरण मित्र के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर जिलाधिकारी को शिकायत सौंपते हुए आरोपी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा सेवा से बर्खास्त करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कर्मचारी ने कथित तौर पर फर्जी मार्कशीट और दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर वर्ष 2015 में स्थायी नियुक्ति प्राप्त की थी। वहीं, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच में तथ्य सामने आने के बावजूद अब तक संबंधित अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

शिकायत के अनुसार नगर पंचायत केलाखेड़ा में वर्ष 2015 में नरेश कुमार की स्थायी नियुक्ति पर्यावरण मित्र के पद पर हुई थी। आरोप है कि नियुक्ति के समय उन्होंने अपने दस्तावेजों में जन्मतिथि 15 अक्टूबर 1994 दर्शाई, जबकि उनकी वास्तविक जन्मतिथि 5 जून 1987 बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियुक्ति के लिए आयु सीमा के अनुरूप पात्र दिखने के उद्देश्य से कथित तौर पर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया। बताया गया कि इस मामले की पहली लिखित शिकायत वर्ष 2022 में प्रशासन से की गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लंबे समय तक इस प्रकरण पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। लगातार शिकायतें किए जाने के बाद वर्ष 2025 में जिलाधिकारी उधम सिंह नगर द्वारा मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारी के पास दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र होने की पुष्टि की है। इसी आधार पर अब शिकायतकर्ता जांच रिपोर्ट के अनुरूप कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी कर्मचारी ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त की है तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए और सेवा नियमों के अनुसार उसे तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी उधम सिंह नगर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत केलाखेड़ा के अधिशासी अधिकारी (ईओ) तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा जांच रिपोर्ट आने के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। शिकायतकर्ताओं ने प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती है तो इससे शासन की मंशा पर सवाल खड़े होंगे। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई होना आवश्यक है ताकि सरकारी नियुक्तियों की विश्वसनीयता बनी रहे और भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।