सावधान! आस्था का फायदा उठाकर सोशल मीडिया में नीब करौरी बाबा के नाम पर ऑनलाइन ठगी का खेल! चमत्कार होगा कहकर श्रद्धालुओं से की जा रही पैसों की मांग,कार्रवाई की मांग

Beware! Exploiting faith, online fraud is being perpetrated on social media in the name of Neeb Karori Baba! Devotees are being asked to pay money, promising a miracle will occur. Action is demanded.

सोशल मीडिया पर इन दिनों नैनीताल कैंची धाम के प्रसिद्ध संत नीब करौरी बाबा के नाम का दुरुपयोग कर श्रद्धालुओं को ठगने की कोशिशें तेजी से बढ़ रही हैं। फेसबुक पर कुछ पेज और ग्रुप ऐसे पोस्ट साझा कर रहे हैं जिनमें लोगों से दावा किया जा रहा है कि "251 रुपये भेजकर सात बार 'जय श्री राम' लिखें, फिर प्रभु की कृपा देखें।" पोस्ट के साथ सीधे UPI QR कोड भी दिया जा रहा है, जिससे लोग ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। महालक्ष्मी का दरबार नाम के एक फेसबुक पेज द्वारा इस तरह की वसूली नीब करौरी बाबा के नाम पर धड़ल्ले से की जा रही है।


धार्मिक आस्था का लाभ उठाकर इस तरह की पोस्ट के माध्यम से लोगों से पैसे वसूलना गंभीर चिंता का विषय है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ऐसी पोस्टों पर हजारों लोगों की प्रतिक्रियाएं और शेयर भी देखने को मिल रहे हैं, जिससे अधिक लोग इनके जाल में फंस सकते हैं। बताया जा रहा है कि फेसबुक पर "महालक्ष्मी का दरबार" के अलावा और भी कई सोशल मीडिया पेज और ग्रुप इस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं। 

इस मामले को लेकर नैनीताल के पूर्व बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद जिला संयोजक प्रदीप सिंह बोरा ने इन पोस्टों को भ्रामक बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा है कि किसी भी संत, मंदिर या धार्मिक संस्था के नाम पर यदि सोशल मीडिया के माध्यम से पैसे मांगे जा रहे हों, तो पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें। केवल सोशल मीडिया पोस्ट देखकर किसी भी QR कोड पर भुगतान करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।


क्या करें?

किसी भी वायरल धार्मिक पोस्ट पर आंख बंद कर भरोसा न करें।

QR कोड स्कैन करने या पैसे भेजने से पहले उसकी सत्यता जांचें।

संदिग्ध पोस्ट या पेज को फेसबुक पर रिपोर्ट करें।
यदि ठगी का संदेह हो तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।

अपने परिवार और परिचितों, विशेषकर बुजुर्गों को भी इस तरह की ऑनलाइन ठगी के प्रति जागरूक करें।

धार्मिक आस्था लोगों की निजी भावना है, लेकिन इसी भावना का फायदा उठाकर यदि कोई व्यक्ति या समूह आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश करता है, तो यह न केवल अनैतिक है बल्कि कानून के दायरे में भी आ सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों को जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।