शुद्धिकरण' बवाल के बीच कुमाऊं दौरे पर आ रहे बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन: कांग्रेस का तंज-गलती का अहसास, माफी मांगने आ रहे,बीजेपी बोली-सैनिक और सिख सम्मेलन में लेंगे हिस्सा
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के जनसभा स्थल के 'शुद्धिकरण' को लेकर देश भर में मचा सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी गरमाए माहौल के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आगामी 9 और 10 सितंबर को कुमाऊं क्षेत्र के दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनके इस दौरे को लेकर उत्तराखंड की राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। जहां एक ओर बीजेपी इसे पूर्व सैनिकों और सिख समुदाय को समर्पित एक संगठनात्मक दौरा बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस पर करारा तंज कसते हुए इसे बीजेपी का 'प्रायश्चित दौरा' करार दिया है।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे को ‘शुद्धिकरण’ विवाद से जोड़ते हुए दावा किया कि नितिन नवीन जनता से माफी मांगने और खेद जताने आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हल्द्वानी में खड़गे की जनसभा के बाद हुए घटनाक्रम से भाजपा की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचा है और अब पार्टी इसकी भरपाई करने की कोशिश कर रही है। अमरेंद्र बिष्ट ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कुमाऊं दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब शुद्धिकरण का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले दलितों को लेकर विवादित बयानबाजी हुई और अब सिख सम्मेलन के जरिए अल्पसंख्यक समाज को साधने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा संसद में इस मामले पर खेद व्यक्त कर चुके हैं। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को दौरे का उद्देश्य नहीं बताया है। रुद्रपुर में सिख सम्मेलन की जिम्मेदारी संभाल रहे कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सिख और पूर्व सैनिक सम्मेलन में भाग लेने के साथ जनता और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धरातल पर तैयारियां लगातार की जा रही हैं। सौरभ बहुगुणा ने कहा कि पिछले चार वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उत्तराखंड आ चुके हैं। इस बार भी राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा संगठन और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने वाला होगा। उनके मुताबिक लोगों को सरकार की योजनाओं की जानकारी देने और विभिन्न मुद्दों पर जनता से बातचीत करने पर भी जोर रहेगा। शुद्धिकरण’ विवाद की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को हुई थी, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। इसके तीन दिन बाद 11 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन ने उस जनसभा स्थल और मंच का शुद्धिकरण किया था। इसके बाद यह मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया और कांग्रेस ने इसे दलितों के अपमान से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा। मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके हैं और शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर चुके हैं। कांग्रेस ने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा द्वारा संसद में खेद जताने के बाद भी विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। ऐसे में नितिन नवीन का कुमाऊं दौरा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हल्द्वानी में कार्यसमिति और पूर्व सैनिक सम्मेलन के बाद रुद्रपुर में सिख सम्मेलन में उनकी मौजूदगी को संगठनात्मक और सामाजिक दोनों स्तरों पर अहम माना जा रहा है। एक ओर भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रमों के जरिए कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों से संवाद मजबूत करने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस इसे ‘शुद्धिकरण’ विवाद के बीच भाजपा के जवाब और संभावित खेद से जोड़ रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नितिन नवीन हल्द्वानी और रुद्रपुर के कार्यक्रमों में किन मुद्दों को उठाते हैं और ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर कोई सीधा संदेश देते हैं या नहीं। उनके कुमाऊं दौरे से संगठन को चुनावी तैयारी का संदेश मिलने के साथ ही इस विवाद पर भाजपा का रुख भी स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है।