Sep 03, 2026 Login

नैनीताल के इतिहास को शब्दों में सहेजने वाले डॉ. तिवारी को राजभाषा गौरव पुरस्कार! CM धामी ने दी शुभकामनाएं

Dr. Tiwari, who has chronicled the history of Nainital, receives the Rajbhasha Gaurav Puraskar! CM Dhami extends his congratulations.

देहरादून। उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं साहित्यकार डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को उनकी पुस्तक ‘अतीत से वर्तमान तक: नैनीताल का सफर और गांधी राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा’ के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से राजभाषा गौरव पुरस्कार प्रदान किए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इसे डॉ. तिवारी के उत्कृष्ट लेखन, शोधपरक दृष्टि और पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सम्मान बताया। 

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. तिवारी को मिला यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि डॉ. तिवारी अपने लेखन एवं रचनात्मक कार्यों के माध्यम से प्रदेश के इतिहास, संस्कृति और विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का प्रयास आगे भी जारी रखेंगे। पुस्तक में नैनीताल के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश तथा यहां की महत्वपूर्ण धरोहरों को शोधपरक और रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री के संदेश के अनुसार, पुस्तक में विशेष रूप से लोह भवन, नैनीताल के 125 वर्षों के इतिहास, उसकी स्थापत्य शैली, निर्माण प्रक्रिया और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को चित्रों एवं प्रमाणिक सामग्री के साथ प्रस्तुत किया गया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल महज एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि अपने भीतर समृद्ध इतिहास, लोक परंपराओं, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए एक विशिष्ट ऐतिहासिक नगर है। ऐसे में डॉ. तिवारी की पुस्तक इस विरासत को समझने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि राजभाषा गौरव पुरस्कार से सम्मानित यह कृति उत्तराखंड के इतिहास, संस्कृति, परंपरा और स्थापत्य कला को व्यापक पहचान दिलाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली अतीत से जोड़ने का माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री ने डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को एक बार फिर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे भविष्य में भी अपने लेखन और रचनात्मक कार्यों के जरिए उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान, इतिहास और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने में योगदान देते रहें।