Sep 03, 2026 Login

उत्तराखंडः पारंपरिक वन निवासियों को कब मिलेगा वन अधिकार अधिनियम का लाभ? हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 2 सप्ताह में मांगा शपथ पत्र

Uttarakhand: When will traditional forest dwellers receive the benefits of the Forest Rights Act? High Court takes a strict stance, seeks an affidavit from the government within two weeks.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में वन क्षेत्र में रहने वाले पारंपरिक वन निवासियों को वन अधिकार अधिनियम का लाभ नहीं मिलने के मामले में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार से 2 सप्ताह में शपथ पत्र पेश कर यह बताने को कहा है कि वनाधिकार अधिनियम नियम 2-A के तहत प्रदेश में किन-किन गांवों और तोकों को चिन्हित किया गया है और वहां वन अधिकारों के दावों की पहचान के लिए ग्राम और अन्य स्तरों पर कमेटियों के गठन को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 2 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। बता दें कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2006 में वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बावजूद उत्तराखंड में इसके प्रावधानों का समुचित लाभ पारंपरिक वन निवासियों को नहीं मिल पा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि अधिकारों की पहचान और दावों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण कई बार वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को वन विभाग की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। याचिका में वन अधिकार अधिनियम के तहत पात्र लोगों को मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं का लाभ दिलाने की भी मांग की गई है। याचिका में पहले ग्राम और तोक स्तर पर कमेटियों का गठन कर वन निवासियों के अधिकारों की पहचान कर दावों और अपील की प्रक्रिया पूरी होने पर पात्र वन निवासियों को उनके अधिकार प्रदान किए जाए।