आवाज़ इंडिया की मुहिम लाई रंग: DU के प्रोफेसर के नाम की चर्चाओं पर लगा विराम! कुमाऊं विश्वविद्यालय के ही प्रो. सतपाल बिष्ट बने VC
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में कुलपति पद को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं और अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। लोकभवन, देहरादून से 3 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट को कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। राज्यपाल एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) की ओर से जारी आदेश में प्रो. बिष्ट की नियुक्ति, कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष अथवा अग्रेतर आदेश, जो भी पहले हो, तक के लिए की गई है। इस नियुक्ति के साथ ही कुमाऊं विश्वविद्यालय के अगले कुलपति को लेकर पिछले काफी समय से चल रही तमाम चर्चाओं और संभावनाओं पर पूर्ण विराम लग गया है। खास बात यह है कि जिन नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा थी, उनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केपी सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया था।
आवाज इंडिया ने प्रमुखता से उठाया था सवाल
कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति चयन को लेकर जब दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केपी सिंह के नाम की चर्चाएं तेज हुई थीं, तब आवाज इंडिया ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाते हुए यह सवाल सामने रखा था कि क्या कुमाऊं विश्वविद्यालय को एक बार फिर उत्तराखण्ड के बाहर से कुलपति मिलेगा या इस बार प्रदेश से ही किसी योग्य व्यक्ति को विश्वविद्यालय की कमान सौंपी जाएगी। उस समय कुलपति पद के लिए करीब 80 आवेदन आने और उनमें से पांच नामों के शॉर्टलिस्ट होने की चर्चा थी। इसी दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केपी सिंह का नाम सबसे अधिक चर्चा में आया था। प्रो. सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस में प्रोफेसर एवं एचओडी हैं। यही नहीं, राज्यपाल गुरमीत सिंह से जुड़े दो प्रकाशनों के संपादन से उनके पूर्व परिचय का तथ्य भी चर्चा का विषय बना था। इन परिस्थितियों के बीच आवाज इंडिया ने कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पद के चयन में योग्यता, अनुभव और पारदर्शी प्रक्रिया को प्राथमिकता दिए जाने का सवाल उठाया था। अब राजभवन से जारी आदेश के बाद इन तमाम चर्चाओं पर विराम लग गया है और कुमाऊं विश्वविद्यालय को उत्तराखण्ड से ही कुलपति मिल गया है।
प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट से कुमाऊं विश्वविद्यालय को उम्मीदें
प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट के कुमाऊं विश्वविद्यालय से पहले से जुड़े होने को इस नियुक्ति की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। वह डीएसबी परिसर, नैनीताल में प्रोफेसर रह चुके हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, परिसर की कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं से वह परिचित माने जाते हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय लंबे समय से शैक्षणिक, प्रशासनिक और व्यवस्थागत चुनौतियों को लेकर चर्चा में रहा है। विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों और कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज इंडिया भी समय-समय पर सवाल उठाता और संबंधित मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाता रहा है। ऐसे में नए कुलपति के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल विश्वविद्यालय का प्रशासन चलाने की नहीं, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता, विद्यार्थियों की समस्याओं, परिसरों की व्यवस्थाओं और लंबित शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी होगी।
बाहर से कुलपति नियुक्त किए जाने की बहस के बीच अलग फैसला
उत्तराखण्ड के विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्तियों को लेकर पिछले कुछ समय से प्रदेश से बाहर के शिक्षाविदों की नियुक्ति भी चर्चा में रही है। हाल ही में 22 जुलाई 2026 को श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के प्रोफेसर अम्बरीश कुमार महाजन की नियुक्ति की गई थी। इससे पहले हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्री प्रकाश सिंह को कुलपति बनाया गया। इसी पृष्ठभूमि में कुमाऊं विश्वविद्यालय के अगले कुलपति को लेकर भी यह सवाल अहम हो गया था कि यहां भी किसी बाहरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को जिम्मेदारी दी जाएगी या फिर उत्तराखण्ड से ही किसी शिक्षाविद् को मौका मिलेगा। अब प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट की नियुक्ति ने इस सवाल का जवाब दे दिया है।
विश्वविद्यालय की पुरानी चुनौतियां, नए कुलपति के सामने बड़ी जिम्मेदारी
कुमाऊं विश्वविद्यालय के नए कुलपति के सामने जिम्मेदारियां कम नहीं हैं। विद्यार्थियों की शैक्षणिक समस्याओं से लेकर परीक्षा व्यवस्था, परिणाम, शोध कार्य, शिक्षकों से जुड़े विषय, परिसरों की व्यवस्थाएं और प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता जैसे कई मुद्दे विश्वविद्यालय के सामने हैं। विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसे में प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट की नियुक्ति के बाद अब विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की निगाहें नई व्यवस्था पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि स्थानीय स्तर की समस्याओं और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से परिचित होने का अनुभव नए कुलपति के लिए अहम साबित होगा और वह लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाएंगे।