कीव में राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिले विदेश मंत्री एस.जयशंकर! शांति प्रयासों के लिए यूक्रेन ने जताया भारत का आभार
नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अपने तीन दिवसीय राजनयिक दौरे के तहत यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। गुरुवार शाम उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने, शांति स्थापित करने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भारत के निष्पक्ष और शांतिप्रिय रुख की जमकर तारीफ की।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने एक बार फिर बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की अपनी नीति को स्पष्ट किया है। यूक्रेन के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार शाम यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी से मुलाकात हुई और रूस-यूक्रेन संघर्ष समेत कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद जेलेंस्की ने भारत के रुख और युद्ध समाप्त कराने की उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जयशंकर के साथ मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए भारत का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन रूस के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता की कद्र करता है। जेलेंस्की ने कहा कि यह समय युद्ध का नहीं, बल्कि शांति का है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनिया की अन्य बड़ी ताकतें भी युद्ध समाप्त करने और स्थायी एवं भरोसेमंद शांति स्थापित करने के लिए स्पष्ट रुख अपनाएंगी। जेलेंस्की ने जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान रूस की ओर से किए गए ड्रोन हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जयशंकर के नेतृत्व वाला भारतीय प्रतिनिधिमंडल यूक्रेन की लड़ाकू विमान व्यवस्था के कारण सुरक्षित रहा। जेलेंस्की ने ईरान की कथित भूमिका का उल्लेख करते हुए रूस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे शहेद ड्रोन का भी जिक्र किया। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने ब्लैक सी यानी काला सागर की स्थिति पर भी चिंता जताई। दोनों पक्षों के बीच आम नागरिकों के जहाजों की सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति से जुड़े समुद्री मार्गों पर चर्चा हुई। जेलेंस्की ने कहा कि संवेदनशील इलाकों में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बंदरगाहों, खाद्य गलियारों और आपूर्ति व्यवस्था की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई। जेलेंस्की से मुलाकात से पहले जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत का स्पष्ट संदेश रहा कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए तलाशा जाना चाहिए। जयशंकर ने यह संकेत भी दिया कि यदि रूस और यूक्रेन दोनों सहमत हों तो भारत शांति प्रयासों में सहयोग करने के लिए तैयार है। जरूरत पड़ने पर भारत मध्यस्थ की भूमिका निभाने की संभावना पर भी विचार कर सकता है। भारत पहले से ही दोनों देशों के साथ संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह राजनयिक दौरा 3 से 5 सितंबर तक है। यात्रा के दौरान वह यूक्रेन के साथ-साथ पोलैंड भी जाएंगे। दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है। जयशंकर की जेलेंस्की से मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शांति प्रयासों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। भारत लगातार दोनों पक्षों के बीच संवाद और कूटनीति को ही स्थायी समाधान का रास्ता बताता रहा है।