Sep 17, 2026 Login

उत्तराखंडः अदानी कोल पावर प्लांट पर कांग्रेस ने धामी सरकार को घेरा! पवन खेड़ा का दावा- 86 में से 84 टेंडर शर्तों में किया बदलाव, दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मांगा टेंडर प्रक्रिया का हिसाब

Uttarakhand: Congress targets the Dhami government over the Adani coal power plant! Pawan Khera claims that 84 out of 86 tender conditions were altered; demands an account of the tender process durin

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड में 1,320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद के फैसले को लेकर कांग्रेस ने धामी सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि बिजली खरीद से जुड़े टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए और इन बदलावों से अडानी पावर को फायदा पहुंचने की स्थिति बनी। कांग्रेस के मुताबिक, 25 अगस्त 2026 को उत्तराखंड कैबिनेट ने यूपीसीएल को अदाणी पावर लिमिटेड से 25 वर्षों के लिए 1,320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीदने की मंजूरी दी थी। सरकार के अनुसार, यह खरीद टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के जरिए हुई और अदाणी पावर सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी एल-1 बिडर रही। तय टैरिफ ₹5.746 प्रति यूनिट बताया गया है। बिजली छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित संयंत्र से मिलने की बात कही गई है और राज्य को वित्तीय वर्ष 2029-30 से बिजली मिलने की योजना है। पवन खेड़ा ने दावा किया कि वर्ष 2024 में उत्तराखंड सरकार ने UJVN और THDC के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से 1,320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया था। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र से संबंधित मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद जनवरी 2025 में इस संयुक्त उपक्रम को समाप्त कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस के मुताबिक फरवरी 2025 में बिजली खरीद के लिए नया टेंडर जारी किया गया।

खेड़ा ने दावा किया कि इसी प्रक्रिया के दौरान 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि टेंडर की शर्तों में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव क्यों किए गए और क्या इससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बदली गई शर्तों में 1,320 मेगावाट बिजली एक ही बिडर से लेने, पावर प्लांट को उत्तराखंड के बाहर स्थापित करने की अनुमति और बिजली परियोजना से जुड़ी कुछ लागतों का भार राज्य पर आने जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं। उन्होंने निर्माण की समयसीमा और टैरिफ में फिक्स्ड चार्ज से संबंधित प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस का दावा है कि इन बदलावों से प्रस्तावित परियोजना और अदाणी पावर के छत्तीसगढ़ स्थित संयंत्र के बीच समानता बन गई। पार्टी ने 25 साल की बिजली खरीद व्यवस्था को लेकर राज्य के उपभोक्ताओं पर संभावित वित्तीय बोझ का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में सरकार से टेंडर प्रक्रिया, शर्तों में बदलाव और परियोजना चयन से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की। पवन खेड़ा ने पूछा कि UJVN-THDC के प्रस्तावित प्रोजेक्ट को क्यों समाप्त किया गया, टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव क्यों किए गए और पावर प्लांट को उत्तराखंड से बाहर लगाने की अनुमति क्यों दी गई। कांग्रेस ने 25 वर्षों की बिजली खरीद व्यवस्था और उसके आर्थिक प्रभाव को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। फिलहाल विवाद का केंद्र टेंडर की शर्तों में बदलाव, प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया और 25 साल के बिजली खरीद समझौते की आर्थिक शर्तें हैं।