Sep 18, 2026 Login

जौनसार-बावर को सीएम धामी की बड़ी सौगात: हरिपुर में भव्य यमुना घाट का लोकार्पण, 25 फीट ऊंची यमुना प्रतिमा का अनावरण

CM Dhami's major gift to Jaunsar-Bawar: Inauguration of a grand Yamuna Ghat in Haripur and unveiling of a 25-foot-tall Yamuna statue.

देहरादून। जौनसार-बावर के प्रवेश द्वार हरिपुर में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को विकासनगर क्षेत्र के ऐतिहासिक कालसी स्थित हरिपुर में नवनिर्मित भव्य 'यमुना घाट' का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जमुना धाम में माता यमुना की 25 फीट ऊंची अलौकिक प्रतिमा का अनावरण भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पौराणिक स्थलों के विकास और सांस्कृतिक गौरव को पुनः स्थापित करने का कार्य निरंतर जारी है।

जौनसार-बावर के प्रवेश द्वार कालसी क्षेत्र को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी सौगात देते हुए हरिपुर घाट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने हरिपुर तट पर 25 फीट ऊंची मां यमुना की प्रतिमा का भी अनावरण किया। भव्य घाट और यमुना प्रतिमा के निर्माण से हरिपुर को धार्मिक और पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव के पुनर्जागरण का कार्य लगातार जारी है। हरिपुर केवल एक नदी तट नहीं, बल्कि जौनसार-बावर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। यहां यमुना और टौंस सहित अन्य सहायक नदियों का क्षेत्रीय संगम होता है। यमुनोत्री से निकलकर यमुना जब हरिपुर से होकर आगे बढ़ती है तो यह क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है। अब तक प्रदेश में ऐसा कोई प्रमुख यमुना घाट नहीं था, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुविधापूर्वक स्नान और धार्मिक अनुष्ठान कर सकें। इसी आवश्यकता को देखते हुए हरिपुर में भव्य घाट का निर्माण कराया गया है। जौनसार-बावर की धार्मिक परंपराओं में हरिपुर का महत्व पहले से रहा है। क्षेत्र की देव डोलियों को मां यमुना के स्नान के लिए हरिपुर लाने की परंपरा है। घाट के निर्माण से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ धार्मिक आयोजनों को भी व्यवस्थित स्थान मिलने की संभावना है। आने वाले समय में यहां तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। हरिपुर और कालसी का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं है। क्षेत्र में सम्राट अशोक के शिलालेख, गुरु गोबिंद सिंह के बाल्यकाल से जुड़े प्रसंग और प्राचीन अश्वमेघ यज्ञ स्थल जैसे ऐतिहासिक संदर्भ मौजूद हैं। इन स्थलों की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है। यदि धार्मिक स्थलों के साथ इन ऐतिहासिक धरोहरों को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाता है तो जौनसार-बावर की पर्यटन क्षमता और व्यापक हो सकती है।जौनसार-बावर अपनी विशिष्ट संस्कृति, लोक परंपराओं और महासू महाराज की आस्था के लिए भी जाना जाता है। हनोल स्थित महासू मंदिर क्षेत्र की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। वहीं दूसरी ओर स्थानीय अर्थव्यवस्था कृषि, बागवानी और पशुपालन पर आधारित है। किसान कोदो, झंगोरा, मक्का, जौ, गेहूं और धान के साथ अदरक, टमाटर, अरबी, धनिया, मिर्च, बीन, शिमला मिर्च और लहसुन जैसी नगदी फसलों का उत्पादन करते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब, नाशपाती, पुलम और कीवी की बागवानी भी होती है। सहिया मंडी क्षेत्र के किसानों के लिए महत्वपूर्ण बाजार है, जहां इन दिनों अदरक की आवक शुरू हो चुकी है। यहां से कृषि उत्पाद दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचते हैं। ऐसे में धार्मिक पर्यटन के विस्तार का लाभ होटल, ढाबा, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों की बिक्री से जुड़े लोगों को भी मिल सकता है।हरिपुर घाट का लोकार्पण केवल एक नए घाट का उद्घाटन नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ने की दिशा में उठाया गया कदम है। अब चुनौती इस विरासत को व्यवस्थित पर्यटन सुविधाओं, स्वच्छता, यात्री सुविधाओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ विकसित करने की होगी। यदि ऐसा हुआ तो यमुना तट का हरिपुर आने वाले वर्षों में जौनसार-बावर की नई पहचान बन सकता है।