क्या अब इतिहास भी ‘एडिट’ करके पढ़ाया जाएगा? NCERT की किताब में बदली गई प्राचीन प्रतिमा!इतिहासकारों ने उठाए गंभीर सवाल

Will history now be taught in an ‘edited’ form? Ancient statue altered in NCERT textbook; historians raise serious questions.

स्कूली पाठ्यपुस्तकों में क्या पढ़ाया जा रहा है और बच्चों के सामने इतिहास को किस रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, यह केवल अकादमिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व का विषय भी है। पिछले दिनों NCERT की पुस्तकों में किए गए बदलावों को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। पहले न्यायपालिका में भ्रष्टाचार (Corruption in Judiciary) से जुड़े अध्याय को हटाने या संशोधित करने को लेकर सवाल उठे थे, और अब एक नया विवाद इतिहास एवं कला विरासत की प्रस्तुति को लेकर खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि यदि ऐतिहासिक तथ्यों और पुरातात्विक धरोहरों को बदले हुए स्वरूप में बच्चों के सामने रखा जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों के मन में इतिहास की गलत और विकृत तस्वीर स्थापित हो सकती है।
ताजा विवाद NCERT की कक्षा 9 की पुस्तक ‘मधुरिमा’ के पहले अध्याय ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में प्रकाशित मोहनजोदड़ो की प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा ‘डांसिंग गर्ल’ (नर्तकी) की तस्वीर को लेकर है। आरोप है कि पुस्तक में प्रकाशित चित्र में प्रतिमा के कंधों से नीचे के हिस्से को शेडिंग के माध्यम से ढक दिया गया है, जबकि मूल प्रतिमा में यह हिस्सा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इस बदलाव के कारण ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रतिमा ने वस्त्र धारण कर रखे हों, जबकि वास्तविक कलाकृति का स्वरूप इससे भिन्न है।
इतिहासकारों और कला विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रतिमा हड़प्पा सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में से एक है और पिछले लगभग 25 वर्षों से विभिन्न शैक्षणिक पुस्तकों में इसकी मूल तस्वीर ही प्रकाशित होती रही है। चाहे केंद्र में किसी भी दल की सरकार रही हो, प्रतिमा के मूल स्वरूप में इस प्रकार का परिवर्तन पहले कभी नहीं किया गया। आलोचकों के अनुसार इतिहास और कला के दस्तावेजों को बदलकर प्रस्तुत करना शैक्षणिक ईमानदारी के सिद्धांतों के विपरीत है।
लगभग चार इंच ऊंची यह कांस्य प्रतिमा वर्तमान में नई दिल्ली स्थित National Museum में संरक्षित है। यह हड़प्पा सभ्यता के उन्नत धातु विज्ञान और कलात्मक कौशल का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है। प्रतिमा में एक युवा लड़की को आत्मविश्वासपूर्ण मुद्रा में दर्शाया गया है, जिसके बाल जूड़े में बंधे हैं तथा हाथों में चूड़ियां और गले में आभूषण दिखाई देते हैं।
विवाद को लेकर कई इतिहासकारों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इतिहासकार Michel Danino ने इस बदलाव को छात्रों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि किसी ऐतिहासिक कलाकृति के मूल स्वरूप को ढकना एक प्रकार की सेंसरशिप है। उनका तर्क है कि यदि किसी मूर्ति या कलाकृति को उसके वास्तविक रूप में नहीं दिखाया जाएगा तो छात्रों को इतिहास और कला की प्रामाणिक समझ कैसे विकसित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की छेड़छाड़ एक ऐसी ‘नकली कलाकृति’ तैयार करती है जिसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है।
हालांकि NCERT ने इन आरोपों को खारिज किया है। NCERT के निदेशक Dinesh Prasad Saklani का कहना है कि तस्वीर में किए गए बदलाव के पीछे कोई विशेष उद्देश्य नहीं है। उनका तर्क है कि कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में भी डांसिंग गर्ल की तस्वीर अन्य हड़प्पाकालीन अवशेषों की तरह ही प्रकाशित की गई है और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि जिस पुस्तक को लेकर यह विवाद सामने आया है, वह NCERT की नई कला शिक्षा श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे National Education Policy और National Curriculum Framework के तहत तैयार किया गया है। इस श्रृंखला के अंतर्गत कक्षा 1 से 9 तक की नई पुस्तकें जारी की जा चुकी हैं।
इतिहासकार कहते हैं कि इतिहास केवल अतीत का वर्णन नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक स्मृति होता है। ऐसे में पाठ्यपुस्तकों में किसी भी ऐतिहासिक तथ्य, चित्र या कलाकृति को बदले हुए रूप में प्रस्तुत करने का प्रभाव सीधे विद्यार्थियों की समझ और दृष्टिकोण पर पड़ता है। यही कारण है कि NCERT की इस पुस्तक को लेकर उठे सवाल अब केवल एक तस्वीर तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि शिक्षा, इतिहास और अकादमिक पारदर्शिता की व्यापक बहस का हिस्सा बन चुके हैं।