NEET पेपर लीक विवादः PM मोदी का बड़ा ऐलान! नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी हाई-पावर टास्क फोर्स, परीक्षा व्यवस्था में होंगे बड़े सुधार! जानें कौन हैं नंदन नीलेकणि?
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि दिग्गज टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक हाई पावर टास्क फोर्स बनेगी जो परीक्षा व्यवस्था में सुधार लाएगी। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को एक बार फिर इंस्टाग्राम पर आए और परीक्षा सुधारों को लेकर बड़ा ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार कई कदम उठा रही है। जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वो जेलों में सड़ रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि हम फास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं और संसद में सख्त प्रावधानों के साथ नया कानून बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हमें भविष्य के बारे में सोचना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमारी परीक्षा पद्धति को भरोसेमंद, पारदर्शी और एडवांस टेक्नोलॉजी से युक्त होनी चाहिए। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, हमने विश्व प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई-पावर टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया है। ये टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर ध्यान देगी और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता जल्द से जल्द तय की जाएगी। बहुत-बहुत धन्यवाद।
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
नंदन निलेकणि टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज उद्यमी हैं। उन्हें इन्फोसिस के सह-संस्थापक और आधार कार्ड के जनक के रूप में जाना जाता है। उनका पूरा नाम नंदन मोहनराव निलेकणि है। 2 जून 1955 को कर्नाटक के बेंगलुरु में जन्मे नंदन निलेकणि आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं। साल 1981 में नंदन निलेकणि ने Infosys की स्थापना में एन. आर. नारायण मूर्ति और छह साथियों के साथ अहम भूमिका निभाई। ये कंपनी आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल हुई। वो 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के CEO और MD रहे। बाद में 2017 में कंपनी के चेयरमैन के रूप में भी लौटे। यूपीए सरकार ने 2009 में उन्हें यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) का पहला चेयरमैन नियुक्त किया। उनके नेतृत्व में आधार प्रोजेक्ट शुरू हुआ, जिसके तहत भारत के निवासियों को 12 अंकों की पहचान संख्या दी गई। आज आधार को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल आइडेंटिफिकेशन सिस्टम में से एक माना जाता है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने नंदन निलेकणि को बेंगलुरु दक्षिण सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उन्हें बीजेपी के अनंत कुमार के हाथों दो लाख से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बना ली।