नैनीताल:गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे पर कोर्ट का बड़ा फैसला! सिर्फ हस्ताक्षर नहीं, पूरी कानूनी प्रक्रिया जरूरी ,सबूतों के अभाव में अभियोजन पक्ष की दलीलें खारिज,आरोपित बरी

The court's major decision in the Gangster Act case! Not just signatures, the entire legal process is necessary. The prosecution's arguments were rejected due to lack of evidence, and the accused was

नैनीताल। गैंगस्टर एक्ट के एक अहम मामले में नैनीताल स्थित विशेष सत्र न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) की कोर्ट ने अल्मोड़ा निवासी अमन खान को बड़ी राहत देते हुए गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष न तो गैंगस्टर एक्ट के तहत अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पालन साबित कर सका और न ही यह साबित कर पाया कि आरोपी ने कथित आपराधिक गतिविधियों से किसी प्रकार का आर्थिक, भौतिक या अन्य अनुचित लाभ अर्जित किया था। 
कोर्ट ने कहा कि गैंग चार्ट तैयार करने और उसे अनुमोदित करने की प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं है। रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने शासनादेश के अनुरूप स्वतंत्र रूप से विचार-विमर्श कर गैंग चार्ट को मंजूरी दी थी। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल एसएसपी और जिलाधिकारी के हस्ताक्षर होना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। 
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जांच एजेंसी आरोपी द्वारा कथित अपराधों से अर्जित अवैध संपत्ति, आर्थिक लाभ या अन्य लाभ के संबंध में ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। कोर्ट ने माना कि गैंगस्टर एक्ट लगाने के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि आरोपी ने संगठित आपराधिक गतिविधियों के जरिए अनुचित लाभ प्राप्त किया हो, लेकिन अभियोजन ऐसा साबित करने में असफल रहा। 
कोर्ट ने अपने निर्णय में उत्तराखंड हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गैंगस्टर एक्ट के मामलों में शासनादेश के अनुरूप निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। यदि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता तो ऐसी कार्रवाई कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकती। 
इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश ने अमन खान को गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया तथा उसके जमानती बंधपत्रों को भी मुक्त करने का आदेश दिया।