क्या रुद्रपुर से चुनाव लड़ेंगे सीएम धामी? सरस मेले के मंच से दिया बड़ा बयान, सियासी अटकलें तेज

Will CM Dhami contest the elections from Rudrapur? A major statement from the Saras Mela stage has sparked political speculation.

रुद्रपुर। उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के रुद्रपुर से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सरस आजीविका मेले के उद्घाटन समारोह में दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मुख्यमंत्री सुरक्षित सीट की तलाश में हैं? क्या रुद्रपुर विधानसभा से चुनाव लड़ने की रणनीति बन रही है? और यदि ऐसा होता है तो क्या मौजूदा विधायक शिव अरोरा की टिकट पर असर पड़ेगा?

रुद्रपुर के गांधी मैदान में आयोजित सरस आजीविका मेले के मंच से सीएम धामी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने काशीपुर बाईपास पर लगने वाले “रस्तोगी राजमा चावल” के ठेले का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति के शुरुआती दौर में जब उनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे, तब वह वहीं 10 रुपये की प्लेट राजमा चावल खाकर पेट भरते थे। कार्यक्रम में ठेले के संचालक राजाराम रस्तोगी को मंच पर बुलाकर सम्मानित भी किया गया। भावुक क्षण तब आया जब राजाराम रस्तोगी ने मुख्यमंत्री को दोबारा अपने ठेले पर आने का निमंत्रण दिया और सीएम ने जल्द आने का आश्वासन भी दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोग उनके रुद्रपुर से लगाव को देखते हुए उन्हें यहां से चुनाव लड़ने की सलाह देते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, यानी पूरी ताकत के साथ पार्टी को जीत दिलाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि इस बार पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतेंगे। धामी का यह बयान भले ही सामूहिक चुनावी अभियान के संदर्भ में रहा हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रुद्रपुर से उनका भावनात्मक जुड़ाव सियासी संकेत भी दे सकता है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने अपने वर्तमान चंपावत विधानसभा क्षेत्र का जिक्र चुनाव लड़ने के संदर्भ में नहीं किया, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं। रुद्रपुर विधानसभा को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। यदि भविष्य में मुख्यमंत्री यहां से चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, तो मौजूदा सिटिंग विधायक शिव अरोरा की टिकट पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। हालांकि अभी तक पार्टी या मुख्यमंत्री की ओर से ऐसा कोई औपचारिक संकेत नहीं दिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धामी का यह भावनात्मक जुड़ाव उनके जनसंपर्क अभियान का हिस्सा भी हो सकता है। संघर्ष के दिनों की कहानी और आम लोगों से जुड़ाव का संदेश चुनावी माहौल में सकारात्मक असर डालता है। फिलहाल रुद्रपुर से चुनाव लड़ने को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री के बयान ने सियासी चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है। अब देखना होगा कि आगामी चुनावों में धामी किस सीट से मैदान में उतरते हैं और क्या रुद्रपुर की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिलता है।