नेपाल चुनावः राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 119 सीटों पर बनाई प्रचंड लीड! भारत विरोधी नेता केपी ओली की हार तय, जानें कौन हैं बालेन शाह?
नई दिल्ली। नेपाल चुनाव के लिए मतगणना जारी है। इस बीच राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी बंपर जीत की ओर बढ़ रही है। 119 सीटों पर बढ़त के साथ बालेन शाह की पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। झापा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 5 में शुरुआती मतगणना के रुझान में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार बालेन्द्र शाह आगे चल रहे हैं। जेन-जी के फेवरेट बालेंद्र शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली को काफी पीछे छोड़ दिया है। कोसी, मदेश, बागमती, लुंबीनी लगभग सभी प्रांतों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी बढ़त बनाए हुए है। नेपाल के पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड ने रुकुम ईस्ट-1 सीट से जीत दर्ज कर ली है। नेपाल की प्रतिनिधि सभा के लिए गुरुवार को मतदान हुआ था। यह पिछले साल सितंबर में जेन-जी विद्रोह के बाद पहला आम चुनाव है। मतदान खत्म के बाद देर रात ही काउंटिंग शुरू हो गई। चुनाव आयोग का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों से मतपेटियों को इकट्ठा करके मतगणना केंद्रों तक लाने में कम से कम एक दिन लग जाता है, इसलिए बाकी के परिणाम धीरे-धीरे घोषित किए जाएंगे। नेपाल में गुरुवार को प्रतिनिधि सभा के लिए गुरुवार को सुबह सात बजे से 77 जिलों में 23 हजार केंद्रों पर मतदान शुरू हुआ, जो शाम 5 बजे तक चला। इस दौरान 58 पर्सेंट से अधिक वोट पड़े।
कौन हैं बालेन शाह?
35 साल के बालेन शाह ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और कई साल से नेपाल के हिप-हॉप संगीत जगत नेफहॉप से जुड़े रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ बालेन शाह मई 2022 में जब पहली बार नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर बने तो यह सबके लिए चौंकाने वाला था। बालेन शाह लोकप्रिय रैपर थे और जब उन्होंने काठमांडू के मेयर चुनाव में ख़ुद को उतारा तभी से उनके नाम चर्चा में आया। बालेन शाह का जन्म काठमांडू के गैर गाउन में 1990 में हुआ था। बालेन के पिता राम नारायण शाह आयुर्वेद के डॉक्टर हैं और इनकी मां का नाम ध्रुवदेवी शाह है। नेपाल के एक अखबार के अनुसार बालेन बचपन से संगीत प्रेमी थे और टोपियों के शौकीन थे। इनकी पहचान स्ट्रक्चरल इंजीनियर, रैपर, एक्टर, म्यूजिक प्रॉड्यूसर, गीतकार और एक कवि की रही है। बता दें कि पिछले साल सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई। इन प्रदर्शनों में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक ठहराव को लेकर भी गुस्सा था। इन विरोध प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई, जिनमें कई प्रदर्शनकारी थे जिन्हें पुलिस की गोली लगी। इसके बाद उस समय के नेता केपी ओली को पद छोड़ना पड़ा था।