उत्तराखंड/नैनीताल: नैनीताल के अपूर्व कार्की को मिला एक बंदा काफी है फ़िल्म के लिए बेस्ड डाइरेक्टर का फ़िल्म फेयर अवार्ड! द होली एकेडमी और सैंट जोसेफ कॉलेज से की है पढ़ाई, नेपोटिज्म को मात देकर बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में बनाई पहचान
उत्तराखंड जहा एक ओर फिल्म शूटिंग के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन स्टेट बन गया है तो वही यहां के प्रतिभाशाली नौजवान डाइरेक्शन में भी आगे निकलते जा रहे है,उत्तराखंड के नैनीताल निवासी अपूर्व सिंह कार्की को बेस्ट डायरेक्टर का फिल्म फेयर अवार्ड मिलने के बाद ये बात साबित भी हो जाती है। यह अवार्ड उन्हें रविवार को मुंबई में उनकी फिल्म ‘ एक बंदा काफी है’ के लिए दिया गया, जिसमे मनोज बाजपेयी ने एडवोकेट पी.सी.सोलंकी का किरदार निभाया है.जो कि नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रभावशाली बाबा के खिलाफ लड़ाई लड़ता है. आशा राम बाबू पर बनी ये सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है,जिसे अपूर्व कार्की ने शानदार तरीके से बनाकर आखिरकार बेस्ट डाइरेक्टर का अवार्ड जीत ही लिया। फ़िल्म में मनोज बाजपेयी ने गजब का अभिनय कर एक बार फिर साबित किया कि वो किसी भी किरदार में जान डालने में माहिर है। ये फ़िल्म रिलीज होने के कई हफ़्तो तक ग्लोबली नम्बर वन पर ट्रेंड करती रही।

आइये अब आपको बताते है कि बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री जहां नेपोटिस्म की वजह से बाहर के लोग काम करने में मुश्किल हालातो से गुजरते है वहां बेस्ट डाइरेक्टर का अवार्ड पाने वाले अपूर्व कार्की आखिर है कौन?
अपूर्व सिंह कार्की का जन्म 1 नवंबर 1988 को नैनीताल में हुआ था। अपूर्व और अंकित दो जुड़वा भाई है,अपूर्व की प्री स्कूलिंग नैनीताल के जाने माने स्कूल द होली एकेडमी से हुई,वहां की प्रिंसिपल मधु विग बताती है कि अपूर्व शुरू से ही बहुत एक्टिव थे,स्कूल में होने वाले हर प्रोग्राम में बढ़चढ़ पार्टिसिपेट करते थे। द होली एकेडमी में पढ़ाई करने के बाद अपूर्व नैनीताल के ही एस्टिमड कॉलेज सैंट जोसेफ में 1997 से 2005 तक पढ़े,इसके बाद वो नोएडा रयान इंटरनेशनल स्कूल चले गए,वहां उन्होंने दो साल तक पढ़ाई की। इसके बाद अपूर्व ने फ्रेमबॉक्स नोएडा,रिलायंस बिग एनिमेशन, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से फ़िल्म डाइरेक्शन सीखा,उन्होंने ऑटोडेस्क 3डी मैक्स डिप्लोमा,स्क्रिप्ट 2 स्क्रीन प्रोसेस,प्रोडक्शन पाइप लाइन,एडवांस एनिमेशन जैसे तमाम कोर्स किये।
अपूर्व मुंबई फ़िल्म इंडस्ट्री में निर्देशक और सहायक निर्देशक हैं, जिन्हें एक बंदा काफी है, (2023) , द हंड्रेड-फुट जर्नी (2014) और द आम आदमी फैमिली (2016) के लिए जाना जाता है ।

अपूर्व कार्की के पिता (गोपाल सिंह कार्की) जब लखनऊ में तैनात थे तब वहां कई मल्टीप्लेक्स में फिल्में देखा करते थे,और उन फिल्मों पर खूब चर्चा करते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनके पिता उन्हें स्वतंत्रता दिवस (1996) पर एक फ़िल्म दिखाने ले गए थे, जो शायद पहली अंग्रेजी फिल्म थी जो उनजे गृहनगर नैनीताल में भी एक साथ रिलीज हुई थी। बस वही दिन था जब उन्हें भी फिल्मों का चस्का लग गया। उन्होंने बीएससी पूरी की और फिर उनके पिता ने सुझाव दिया कि अगर फिल्मों में रुचि है तो कम से कम 15 साल तो फ़िल्म इंडस्ट्री में देने ही होंगे। उनके वो गोल्डन वर्ड्स अपूर्व को हर कदम पर प्रेरणा देते रहे.. टाइम तो लगेगा पर लक्ष्य हासिल ज़रूर होगा। अपूर्व ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें अपनी पहली फिल्म बनाने में 14 साल लग गए I

सफलता निश्चित रूप से परिणाम देने का दबाव बढ़ाती है, और उम्मीदें अधिक हो जाती हैं! तुलनाएं भी की जाएंगी लेकिन मैं इन सबसे मुझे परेशानी नहीं होने देता।' इसके बजाय, मैं सिर्फ अच्छी स्क्रिप्ट पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं क्योंकि यदि आपके पास एक अच्छी तरह से विकसित विषय है तो आधी लड़ाई जीत ली जाती है। कहानी ही फिल्म का हीरो होती है,'' फिल्म निर्माता ने लखनऊ में अभिनेता मनोज बाजपेयी के साथ फिल्म की शूटिंग के मौके पर कही थी I