Oct 08, 2026 Login
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उत्तराखण्डः मेडिकल बोर्ड के आदेश और गंभीर बीमारी के बावजूद तबादला! हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप, निधन के बाद भाई ने उठाया मामला! चार सप्ताह में मांगा जवाब

Uttarakhand: Transferred despite a medical board order and a serious illness! Allegations of disregarding a High Court order; brother raises the issue after the employee's death! Response sought with

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्वर्गीय गिरधर सिंह बिष्ट के भाई कुलदीप सिंह बिष्ट की ओर से दाखिल रिट याचिका पर राज्य सरकार और महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गंभीर बीमारी के बावजूद गिरधर सिंह का दोबारा तबादला कर दिया गया और हाईकोर्ट के 19 फरवरी 2026 के आदेश का भी अनुपालन नहीं किया गया। मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार और महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तिथि नियत की गई है। बता दें की कुलदीप सिंह बिष्ट ने रिट याचिका दायर कर कहा है कि उनके बड़े भाई स्वर्गीय गिरधर सिंह बिष्ट, जो चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर थे, ने इससे पहले ॅच्ैठध्81ध्2026 के जरिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गिरधर सिंह ने उत्तराखंड ट्रांसफर एक्ट, 2017 की धारा 3(डी) के तहत गंभीर बीमारी से पीड़ित होने का हवाला दिया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, स्टेट मेडिकल बोर्ड की ओर से जारी प्रमाणपत्र में यह स्पष्ट नहीं था कि गिरधर सिंह गंभीर रोगी की निर्धारित श्रेणी में आते हैं या नहीं। मामले में हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को आदेश दिया था कि गिरधर सिंह को स्टेट मेडिकल बोर्ड के सामने पेश किया जाए और उनकी दोबारा जांच की जाए। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को उनके पेश होने के दो दिन के भीतर परीक्षण करने के निर्देश दिए थे, ताकि उनकी बीमारी की स्थिति स्पष्ट हो सके और उसी के आधार पर उनके तबादले पर निर्णय लिया जाए। गिरधर सिंह 28 फरवरी 2026 को स्टेट मेडिकल बोर्ड के सामने पेश हुए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मेडिकल बोर्ड का प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद 5 मई 2026 को उनका दोबारा तबादला कर दिया गया। कुलदीप सिंह का आरोप है कि इस तरह संबंधित अधिकारियों ने हाईकोर्ट के 19 फरवरी के आदेश का अनुपालन नहीं किया। याचिका में यह भी कहा गया है कि गिरधर सिंह की हालत बाद में गंभीर होती गई और वे कोमा में चले गए। इसके बाद 13 जुलाई 2026 को उनका निधन हो गया। स्टेट मेडिकल बोर्ड ने 16 अप्रैल 2026 को एक बार फिर अस्पष्ट मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया, लेकिन उसकी प्रति गिरधर सिंह को उपलब्ध नहीं कराई गई। गिरधर सिंह की मौत के बाद उनके भाई कुलदीप सिंह ने आरटीआई के जरिए इस प्रमाणपत्र की जानकारी हासिल की। अब कुलदीप सिंह बिष्ट ने हाईकोर्ट से संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग की है।