Oct 07, 2026 Login
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किच्छा में कांग्रेस का परचमः राजेश प्रताप सिंह की जीत से बेहड़ का सियासी कद बढ़ा! भाजपा को बड़ा झटका, 2027 से पहले कांग्रेस के लिए जीत बनी संजीवनी

Congress Triumphs in Kichha: Rajesh Pratap Singh’s Victory Boosts Behar’s Political Stature! A Major Setback for the BJP; This Win Acts as a Lifeline for Congress Ahead of 2027.

किच्छा। लंबे इंतजार, सियासी टकराव और हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार किच्छा नगर पालिका चुनाव का परिणाम सामने आ गया है। अध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने जीत दर्ज कर कांग्रेस का परचम लहरा दिया। वहीं वार्डों में भी कांग्रेस का दबदबा देखने को मिला। हांलाकि वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी दमखम दिखाया है। इधर सिरौलीकलां में चारों सभासद और चेयरमैन पर कांग्रेस पार्टी ने जीत दर्ज की। 

राजेश प्रताप सिंह की जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। वहीं भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोड़ा की हार को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि यह चुनाव सिर्फ दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला नहीं रह गया था, बल्कि इसकी सीधी लड़ाई कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ और भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखी जा रही थी। किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए राजेश प्रताप सिंह और संदीप अरोड़ा के बीच शुरू से ही कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। परिणाम आने के बाद कांग्रेस खेमे में जीत का जश्न शुरू हो गया, जबकि भाजपा खेमे में हार को लेकर मंथन का दौर शुरू होना तय माना जा रहा है।

बेहड़ का बढ़ा सियासी कद, कांग्रेस को मिली नई ऊर्जा
किच्छा की राजनीति में विधायक तिलकराज बेहड़ का लंबे समय से प्रभाव माना जाता है। इस निकाय चुनाव में भी पार्टी प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह मैदान में थे, लेकिन चुनाव की पूरी कमान काफी हद तक बेहड़ के हाथों में रही। ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत को विधायक बेहड़ के राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस के लिए यह जीत ऐसे समय पर आई है, जब पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। निकाय चुनाव में मिली सफलता से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा होने की उम्मीद है। 

भाजपा के लिए झटका, शुक्ला की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी
दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोड़ा की हार को पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के लिए भी झटके के तौर पर देखा जा रहा है। चुनाव के दौरान शुक्ला ने प्रत्याशी के समर्थन में पूरी ताकत लगाई थी। ऐसे में परिणाम ने किच्छा की स्थानीय राजनीति में भाजपा के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक रूप से देखें तो यह चुनाव भाजपा के लिए इसलिए भी अहम था क्योंकि पार्टी संगठन आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटा है। किच्छा जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में कांग्रेस की जीत भाजपा के लिए निश्चित तौर पर मंथन का विषय बन सकती है।

पर्दे से शुरू हुआ विवाद, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा चुनाव
किच्छा निकाय चुनाव की कहानी सामान्य चुनावों से बिल्कुल अलग रही। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए 10 सितंबर को नामांकन, 13 सितंबर को नाम वापसी, 22 सितंबर को मतदान और 24 सितंबर को मतगणना की तारीख तय की थी। मतदान तक प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ी, लेकिन मतपेटियों के सामने पर्दा लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद स्ट्रांग रूम के बाहर विधायक तिलकराज बेहड़, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और उनके समर्थक आमने-सामने आ गए थे। हंगामे, नारेबाजी और धक्का-मुक्की के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने मतगणना स्थगित कर दी। इसके बाद मामला नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट में सरकार और प्रशासन की ओर से समय मांगा गया। हाईकोर्ट ने मतगणना कराने के निर्देश दिए, लेकिन कांग्रेस ने देरी पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से अलीना मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जल्द मतगणना की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद बुधवार, 7 अक्टूबर को मतगणना कराने का आदेश दिया। इसके बाद आज मतपेटियां खुलीं और परिणाम सामने आ गया।

सिरौलीकलां में भी कांग्रेस की जीत, डबल सफलता से बढ़ा उत्साह
किच्छा के साथ सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव का परिणाम भी कांग्रेस के पक्ष में गया है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी राशिदा बेगम ने जीत दर्ज की। दोनों निकायों में कांग्रेस की जीत ने पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्साह को और बढ़ा दिया है। किच्छा और सिरौलीकलां के नतीजों को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इन दोनों निकाय चुनावों पर प्रदेशभर की निगाहें लगी थीं।