उत्तराखंड/नैनीताल:उखीमठ स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, चार सप्ताह में मांगी प्रगति रिपोर्ट
नैनीताल।
उखीमठ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और स्वीकृत पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से चार सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अस्पताल प्रशासन की ओर से पूर्व में दी गई रिपोर्ट पर अब तक हुई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। जनहित याचिका में कहा गया है कि उखीमठ क्षेत्र में यह प्रमुख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन यहां मरीजों के लिए पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अधिवक्ता प्रभा नैथानी ने बताया कि याचिका में यह भी कहा गया है कि स्वास्थ्य जांच से संबंधित कई मशीनें ऑपरेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण खराब हो चुकी हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते क्षेत्र की महिलाओं और बुजुर्गों को उपचार के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता जयंत नैथानी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण और सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर क्षेत्र के लोगों ने वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया था। आश्वासन के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। याचिका में स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
खंडपीठ ने मामले को जनस्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय मानते हुए स्वास्थ्य विभाग को चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।