E20 तो बस शुरुआत, E100 पर दौड़ेंगी गाड़ियां: गडकरी ने बताया भविष्य का प्लान, 22 लाख करोड़ के ईंधन आयात पर कसेगा शिकंजा
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल (E20) के सफल सम्मिश्रण के बाद अब भारत सरकार का अगला लक्ष्य 100 प्रतिशत इथेनॉल यानी E100 पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को सड़कों पर उतारना है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वैकल्पिक ईंधन और हरित ऊर्जा को लेकर भारत के भविष्य के रोडमैप का खाका पेश किया है। मध्य प्रदेश में नई सार्वजनिक बस सेवा के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में गडकरी ने कहा कि वैकल्पिक ईंधन न केवल प्रदूषण को खत्म करेगा, बल्कि भारत की विदेशी तेल आयात पर निर्भरता को पूरी तरह समाप्त कर देगा।
भारत में पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था E20 तक पहुंचने के बाद अब सरकार की नजर इससे आगे के विकल्पों पर है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल आधारित ईंधन को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों से जोड़ते हुए कहा है कि ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल इंजन विकसित किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह इथेनॉल यानी E100 पर भी चल सकेंगे। उनका कहना है कि वैकल्पिक ईंधन का विस्तार किसानों की आय बढ़ाने के साथ पेट्रोलियम आयात पर देश की निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है। मध्य प्रदेश में नई सार्वजनिक बस सेवा के उद्घाटन के बाद आयोजित कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि किसान अब केवल ‘अन्नदाता’ ही नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ भी हैं। उनके मुताबिक, देश में इथेनॉल उत्पादन बढ़ने का असर कृषि उपज के बाजार पर भी पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल उत्पादन बढ़ने के बाद मक्के की कीमत करीब 1200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची है। गडकरी ने कहा कि इथेनॉल आधारित फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को आगे बढ़ाया जा रहा है और इस तकनीक से लैस वाहनों को बाजार में लाने की दिशा में काम हो रहा है। उनके अनुसार, स्वदेशी ईंधन स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण कम करने और आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने देश के पेट्रोलियम आयात का जिक्र करते हुए कहा कि भारत फिलहाल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोलियम आयात करता है। ऐसे में इथेनॉल, बिजली, हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ हाइड्रोजन आधारित परिवहन को भी आगे बढ़ा रही है। गडकरी ने बताया कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पहले ही लॉन्च किए जा चुके हैं, जबकि हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों पर भी काम जारी है। उन्होंने अपने हाइड्रोजन वाहन ‘मिराई’ का जिक्र करते हुए कहा कि इसका अर्थ ही ‘भविष्य’ है। सरकार की योजना 10 रूटों पर हाइड्रोजन बसें चलाने की भी है। इस पूरी रणनीति में केवल निजी कारों को वैकल्पिक ईंधन पर लाने की बात नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन को भी नई ऊर्जा तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश में शुरू की गई नई बस सेवा का उद्देश्य सुरक्षित, सस्ता और जवाबदेह सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना बताया गया है। गडकरी ने कहा कि गरीब और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए और एसी बसों में भी उन्हें सुविधाजनक यात्रा का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बसों का किराया डीजल बसों की तुलना में करीब 30 प्रतिशत कम रखने का लक्ष्य है। यानी सरकार की प्रस्तावित परिवहन नीति में एक तरफ ईंधन के विकल्प बदलने पर जोर है, तो दूसरी तरफ यात्रियों के लिए परिवहन को किफायती बनाने की कोशिश भी शामिल है। E20 से आगे E100 की दिशा में बढ़ने की यह पहल भारत के परिवहन क्षेत्र में एक बड़े तकनीकी बदलाव की ओर संकेत करती है। हालांकि, इसके लिए पर्याप्त इथेनॉल उत्पादन, वाहनों की तकनीक, ईंधन की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और उपभोक्ताओं के लिए लागत जैसे पहलुओं को साथ-साथ विकसित करना होगा। फिलहाल सरकार का जोर पेट्रोलियम आधारित परिवहन के साथ इथेनॉल, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन जैसे विकल्पों का दायरा बढ़ाने पर है।