Oct 01, 2026 Login

एनएचएआई का 'मिशन क्वालिटी': घटिया काम और टेंडर में मनमानी करने वालों पर कसेगा शिकंजा,स्पेशल 39' की टीम करेगी सर्जिकल स्ट्राइक,लगेगा 2 साल का बैन

NHAI's 'Mission Quality': Crackdown on those responsible for substandard work and arbitrary tendering practices; a 'Special 39' team to conduct 'surgical strikes,' with offenders facing a two-year ba

नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों, कंपनियों और लापरवाह अधिकारियों की अब खैर नहीं है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने घटिया निर्माण और टेंडर में भारी डिस्काउंट देकर काम हथियाने वाली कंपनियों के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। प्राधिकरण ने ऐसे 17 बड़े प्रोजेक्ट्स की सघन जांच के लिए देश के 39 अति-अनुभवी और सेवानिवृत्त इंजीनियरों की एक विशेष टीम 'स्पेशल 39' गठित की है। यह टीम उन परियोजनाओं का कड़ा निरीक्षण करेगी, जिनके टेंडर आधार मूल्य से 15% या उससे अधिक कम दर (अंडर-बाइडिंग) पर लिए गए थे।

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निगरानी का दायरा और सख्त कर दिया है। अब कम दर पर टेंडर हासिल करने वाली कंपनियों और निर्माण कार्य की निगरानी करने वाली एजेंसियों की भी विशेष जांच होगी। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अगुआई में 39 अनुभवी और सेवानिवृत्त इंजीनियरों की विशेष टीम तैयार की गई है। यह टीम देश की 17 निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता की अलग से जांच करेगी। इन 17 परियोजनाओं का चयन ऐसे मामलों में किया गया है, जहां ठेकेदार कंपनियों ने निविदा के आधार मूल्य की तुलना में 15 प्रतिशत या उससे अधिक कम दर पर बोली लगाई है। परियोजनाओं की लागत 500 करोड़ रुपये से अधिक है और निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति 35 से 80 प्रतिशत के बीच है। एनएचएआई के मुताबिक, इन परियोजनाओं की जांच नियमित गुणवत्ता निरीक्षण से अलग होगी। इसका उद्देश्य निर्माण के दौरान ही संभावित खामियों को पहचानना और समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई करना है। विशेष टीम में रेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और विभिन्न राज्यों के लोक निर्माण विभागों से जुड़े अनुभवी तथा सेवानिवृत्त इंजीनियर शामिल हैं। जरूरत के अनुसार तकनीकी विशेषज्ञ भी निरीक्षण टीम की सहायता करेंगे। जांच का पहला चरण दिसंबर 2026 तक पूरा किए जाने की उम्मीद है। इसके करीब छह महीने बाद अलग विशेषज्ञ टीम इन परियोजनाओं का दोबारा निरीक्षण करेगी, ताकि यह देखा जा सके कि पहली जांच में सामने आई कमियों को निर्धारित मानकों के अनुसार दूर किया गया या नहीं। जांच के दायरे में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश की परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें ग्रीनफील्ड हाईवे, एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर, बाईपास और चार या छह लेन की सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। विशेषज्ञ टीम निर्माण कार्य को स्वीकृत ड्राइंग, तकनीकी स्पेसिफिकेशन, अनुबंध की शर्तों और परियोजना-विशिष्ट गुणवत्ता योजना के आधार पर परखेगी। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, काम करने की निर्धारित विधि, सैंपलिंग और टेस्टिंग के रिकॉर्ड भी जांचे जाएंगे। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को भी निरीक्षण में शामिल किया गया है। एनएचएआई ने बड़ी खामी की स्थिति में केवल ठेकेदार को जिम्मेदार मानने के बजाय सुपरविजन से जुड़ी एजेंसियों की जवाबदेही भी तय करने का प्रावधान किया है। कैटेस्ट्रॉफिक फेल्योर यानी ऐसी गंभीर खामी जिसे सामान्य सुधार से दूर नहीं किया जा सकता, सामने आने पर अथॉरिटी इंजीनियर, इंडिपेंडेंट इंजीनियर और सुपरविजन कंसल्टेंट की भूमिका की भी जांच होगी। नई व्यवस्था के तहत डिजाइन और ड्राइंग की समीक्षा, नियमित निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण तथा सुरक्षा मानकों के पालन की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों और एजेंसियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। यदि गंभीर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित टीम लीडर या व्यक्ति को परियोजना से हटाया जा सकता है और अधिकतम दो वर्ष तक प्रतिबंधित किया जा सकता है। कंसल्टेंट फर्मों के लिए भी प्रावधान कड़े किए गए हैं। गंभीर खामी के मामलों में संबंधित फर्म को मंत्रालय और उसके अधीन एजेंसियों के अथॉरिटी इंजीनियर, इंडिपेंडेंट इंजीनियर और सुपरविजन कंसल्टेंट से जुड़ी निविदाओं में दो साल तक भाग लेने से रोका जा सकता है। इसके अलावा पहली बार परफॉर्मेंस बैंक सिक्योरिटी में 50 प्रतिशत तक कटौती का प्रावधान भी शामिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर एनएचएआई अपने विवेक से अनुबंध निरस्त कर सकता है और संबंधित एजेंसी या कंपनी की रेटिंग में नकारात्मक अंकन भी किया जा सकता है। यानी नई व्यवस्था में कम बोली लगाकर ठेका हासिल करने से लेकर निर्माण की निगरानी तक पूरी प्रक्रिया को गुणवत्ता और जवाबदेही के नजरिए से परखा जाएगा। 17 परियोजनाओं की यह विशेष जांच आने वाले समय में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गुणवत्ता और ठेकेदारों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।