वैश्विक महाशक्तियों का महामंथन: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर वार्ता, ट्रेड-डिफेंस और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर बना रोडमैप
नई दिल्ली। विश्व के दो सबसे बड़े और प्रभावशाली लोकतांत्रिक देशों भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के शीर्ष नेताओं ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत साझेदारी का मुजाहिरा किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ टेलीफोन पर एक अत्यंत सार्थक और उच्चस्तरीय बातचीत की। इस रणनीतिक वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार (ट्रेड),रक्षा (डिफेंस),ऊर्जा और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (अहम तकनीक) सहित द्विपक्षीय सहयोग के तमाम महत्वपूर्ण क्षेत्रों की गहन समीक्षा की।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से लेकर रक्षा और रणनीतिक तकनीक तक सहयोग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने फोन पर द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा की और व्यापार, रक्षा, ऊर्जा तथा क्रिटिकल टेक्नोलॉजी में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत को सार्थक बताते हुए कहा कि दोनों देशों की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए लगातार संपर्क और करीबी समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी है। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में आपसी सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। सितंबर के अंत में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अमेरिका दौरे का कार्यक्रम भी सामने आया है। उनका दौरा 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक प्रस्तावित है और इसका उद्देश्य भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाना है। दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ रक्षा और रणनीतिक तकनीक भी संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। जून 2026 में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की मुलाकात में भी ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा हुई थी। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट पहल के तहत हुई प्रगति का जायजा लिया था और द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर संतुलित एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यवस्था की दिशा में काम करने पर जोर दिया था। टेलीफोन वार्ता में द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री के मुताबिक, बातचीत में वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए सहयोग और समन्वय जारी रखने की इच्छा व्यक्त की। क्रिटिकल टेक्नोलॉजी का मुद्दा भारत-अमेरिका संबंधों में लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, उन्नत रक्षा तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्र दोनों देशों के व्यापक तकनीकी सहयोग से जुड़े हैं। हाल के महीनों में अमेरिका भी महत्वपूर्ण तकनीकी और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है। ऊर्जा क्षेत्र भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा है। भारत की ऊर्जा जरूरतों, वैश्विक ऊर्जा बाजार और रणनीतिक आपूर्ति के संदर्भ में दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसर मौजूद हैं। ऐसे में मोदी-ट्रंप की बातचीत में ऊर्जा को प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया जाना द्विपक्षीय एजेंडे के व्यापक दायरे को दर्शाता है। भारत और अमेरिका के बीच संबंध अब केवल व्यापार या रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं। तकनीक, ऊर्जा, निवेश और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी साझेदारी के केंद्र में हैं। जून में दोनों नेताओं की बैठक के बाद भी दोनों पक्षों ने व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। मोदी-ट्रंप की ताजा बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता के साथ वैश्विक स्तर पर तकनीकी और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी तेज है। ऐसे में फोन पर हुई यह बातचीत दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को जारी रखने और व्यापार, रक्षा, ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अगले चरण के लिए संपर्क बनाए रखने का संकेत देती है।