उत्तराखण्डः बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे ग्रामीण! भारी बारिश में निकाली विशाल रैली
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर रविवार को ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण वन अधिकार समिति के बैनर तले एकजुट हुए और विशाल रैली निकालकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने सरकार से वर्षों पुरानी मांग पर जल्द निर्णय लेने और बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण जड़ सेक्टर के पास एकत्र हुए, जहां से रैली शुरू हुई। बारिश के बीच नारेबाजी करते हुए ग्रामीण लालकुआं तहसील परिसर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिंदुखत्ता क्षेत्र को राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। तहसील परिसर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग पर जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि बिंदुखत्ता क्षेत्र की बड़ी आबादी लंबे समय से राजस्व गांव के दर्जे की मांग कर रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र को राजस्व गांव का दर्जा मिलने से विकास कार्यों को गति मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के निस्तारण में भी सुविधा होगी। ग्रामीणों के मुताबिक राजस्व गांव का दर्जा नहीं होने के कारण क्षेत्र से संबंधित कई मामलों में लोगों को प्रशासनिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिंदुखत्ता की यह मांग नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से ग्रामीण इसे सरकार के सामने उठाते आ रहे हैं। इसके बावजूद मांग लंबित रहने से लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए राजस्व गांव का दर्जा देने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए। भारी बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों का रैली में शामिल होना इस मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर जारी आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी वर्षों पुरानी मांग को लेकर लगातार आवाज उठाते रहेंगे और सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं।