उत्तराखण्डः आय से अधिक संपत्ति मामले में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को विजिलेंस कोर्ट का नोटिस! 3 सितंबर को पेश होकर रखना होगा पक्ष, गरमाई सियासत

Uttarakhand: Vigilance Court issues notice to Cabinet Minister Ganesh Joshi in a disproportionate assets case! He must appear and present his side on September 3; political temperatures rise.

देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एक बार फिर आय से अधिक संपत्ति के मामले को लेकर चर्चा में हैं। देहरादून की विजिलेंस कोर्ट ने इस मामले में उन्हें नोटिस जारी किया है। अदालत ने गणेश जोशी को आगामी 3 सितंबर 2026 को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले सामने आए इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, अदालत की ओर से नोटिस जारी किया जाना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार, 25 जुलाई को देहरादून स्थित विशेष न्यायाधीश (विजिलेंस) की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता पंकज सिंह क्षेत्री की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत मंत्री गणेश जोशी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि किसी भी तरह का आदेश पारित करने से पहले दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाना जरूरी है। इसी के तहत अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय की गई है। बताया जा रहा है कि गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर पिछले कई वर्षों से कानूनी प्रक्रिया चल रही है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि मंत्री की घोषित आय और उनके पास मौजूद संपत्तियों के बीच कथित तौर पर अंतर है। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसी शिकायत के आधार पर यह मामला विजिलेंस और अदालत तक पहुंचा था। इस दौरान जांच, अभियोजन स्वीकृति और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर भी मामला चर्चा में रहा है। वहीं, कांग्रेस ने कोर्ट के नोटिस को लेकर सरकार और मंत्री गणेश जोशी पर हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने आरोप लगाया कि मंत्री पर लंबे समय से गंभीर आरोप लगते रहे हैं और विजिलेंस की ओर से जांच की अनुमति मांगे जाने के बावजूद अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि मंत्री को अपने कथित कृत्यों का जवाब देना चाहिए।