उत्तराखण्डः बरसाती नाले में समा गई दो मासूम जिंदगियां! देहरादून के क्लेमेनटाउन में नहाने गईं सगी बहनें तेज बहाव में बहीं, रैंप के नीचे फंसे मिले शव
देहरादून। राजधानी देहरादून के क्लेमेंटाउन से एक दुखद खबर सामने आई है, यहां बारिश के बाद उफान पर आए एक बरसाती नाले ने दो मासूम बहनों की जिंदगी छीन ली। घर के बाहर खेलते-खेलते नाले में नहाने गई सात वर्षीय लक्ष्मी कुमारी और 3 वर्षीय सोनाक्षी कुमारी अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गईं। दोनों बहनें नाले के ऊपर बने रैंप के नीचे फंस गईं। स्थानीय लोगों ने उन्हें बाहर निकालने की भरसक कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों मासूमों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा क्लेमेंटाउन थाना क्षेत्र की नई बस्ती स्थित दुर्गा मंदिर के पास गुरुवार देर शाम हुआ। घटना की सूचना मिलते ही क्लेमेंटाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन स्थानीय लोगों ने पहले ही दोनों बच्चियों को बाहर निकाल लिया था। चिकित्सकीय परीक्षण में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। मृतक बच्चियों की मां रीना कुमारी ने बताया कि दोपहर के समय दोनों बेटियां घर के बाहर खेल रही थीं और पास से गुजर रहे बरसाती नाले में नहाने चली गईं। इसी दौरान अचानक बारिश का पानी तेजी से नाले में आया और बहाव इतना तेज हो गया कि दोनों बच्चियां उसमें बह गईं। रीना कुमारी ने बताया कि काफी देर तक जब दोनों बच्चियां घर नहीं लौटीं तो परिवार और आसपास के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान नाले के ऊपर बने रैंप के नीचे बड़ी बेटी लक्ष्मी का पैर दिखाई दिया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और दोनों बच्चियों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान यह नाला हर साल उफान पर रहता है, लेकिन इसके बावजूद यहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों बच्चियां नाले के तेज बहाव में बहकर रैंप के नीचे फंस गई थीं। दम घुटने और डूबने के कारण उनकी मौत हो गई। पुलिस ने दोनों शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है। साथ ही घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार की अन्य संदिग्ध परिस्थिति सामने नहीं आई है। मृत बच्चियों की मां रीना कुमारी ने बताया कि उनका परिवार मूल रूप से बिहार के खगड़िया जिले का रहने वाला है। बेहतर रोजगार की तलाश में परिवार देहरादून आया था और क्लेमेंटाउन की नई बस्ती में किराये के मकान में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करता है। हादसे के समय उनके पति किसी काम से बिहार गए हुए थे। घटना की सूचना उन्हें दे दी गई है और उनके देहरादून लौटने का इंतजार किया जा रहा है। इस हृदयविदारक हादसे ने एक बार फिर बरसात के मौसम में खुले नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।