उत्तराखंड सुरंग हादसा: रेस्क्यू मिशन के बीच अचानक शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन! मजूदरों की पुलिस से धक्का-मुक्की
उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में 40 श्रमिकों की जान सुरंग में कैद है। पिछले 78 घंटे से सिलक्याला सुरंग में 40 जिंदगियों की सांस अटकी हुई है। इन श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चल रहे खोज बचाव अभियान में कई तरह की बाधाएं उत्पन्न हो रही है। पहले कैविटी वाले क्षेत्र से लगातार गिर रहे मलबे ने राह रोकी और फिर मशीन खराब हो गई। इस बीच सिलक्यारा टनल में श्रमिकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि सुरंग के मलबे में फंसे उनके साथियों को जल्द निकाला जाए।
उत्तरकाशी के सिलक्यारा में एक ओर जहां रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है। वहीं एक अजीब स्थिति भी पैदा हो गई है। सुरंग के दुर्घटनास्थल पर मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन कर दिया है। एक तरफ टनल के अंदर जोरदार ढंग से रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। दूसरी तरफ टनल के मलबे में फंसे श्रमिकों के साथियों ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया है। रविवार 12 नवंबर को उत्तरकाशी के सिलक्यारा में चारधाम रोड परियोजना की टनल में भू धंसाव हो गया था। देखते ही देखते 40 मजदूर मलबा आने के कारण टनल के अंदर फंस गए थे। आनन फानन में रेस्क्यू कार्य शुरू किया गया. इस दौरान पता चला कि रेस्क्यू करना इतना आसान नहीं है. तब ड्रिल करने के लिए ऑगर मशीन मंगाई गई। ऑगर मशीन से ड्रिलिंग करते समय ताजा मलबा टनल में गिरने लगा. इससे रेस्क्यू की रफ्तार धीमी हो गई। अब एयरफोर्स की मदद से हैवी ऑगर ड्रिलिंग मशीन मंगाने की कार्रवाई चल रही है। चार दिन बाद भी टनल के मलबे में फंसे 40 मजदूरों का रेस्क्यू नहीं होने के कारण उनके साथी आज आक्रोशित हो गए। टनल में फंसे मजदूरों के साथियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जल्द से जल्द रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया जाए। मजदूरों का कहना है कि उनके साथियों की जान खतरे में है। ऐसे में जितनी जल्दी रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा करके उनके साथियों को टनल से बाहर निकाल लिया जाए। उतना ही अच्छा होगा। मजदूरों के विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। प्रशासन के लोग टनल पर विरोध प्रदर्शन कर रहे मजदूरों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल प्रदर्शनकारी मजदूर मानने को तैयार नहीं है। मौके पर लगभग 60 से 65 मजदूर हंगामा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अब तक बचाने के लिए जो काम हो रहे हैं वह नाकाफी हैं और लगातार देरी होती जा रही है। मजदूर इस बात की मांग भी कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद ग्राउंड के हालात को देखकर निर्णय करें कि आखिरकार टनल से जुड़े अधिकारी इस मामले में क्या कुछ कर रहे हैं।