Oct 08, 2026 Login
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मानव तस्करी पर उत्तराखंड में मंथन, 150 अधिकारी बनाएंगे रोकथाम की ठोस रणनीति,पांच पड़ोसी राज्यों के अधिकारी भी होंगे शामिल

Deliberations on human trafficking in Uttarakhand: 150 officials to formulate a concrete prevention strategy; officials from five neighboring states will also participate.

रुद्रपुर। मानव तस्करी जैसे अति-संवेदनशील और जघन्य अपराध पर अंकुश लगाने के लिए उत्तराखंड पुलिस और भारत सरकार ने एक बड़ी अंतरराज्यीय पहल की है। उधम सिंह नगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मानव तस्करी की रोकथाम को लेकर एक विशाल और महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस समागम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों और विभागों के बीच आपसी समन्वय स्थापित कर एक ठोस तथा अभेद्य सुरक्षा रणनीति तैयार करना है।

मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध पर प्रभावी रोक लगाने और इसके पीछे सक्रिय तंत्र पर शिकंजा कसने के लिए उधम सिंह नगर के पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बड़ा सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। भारत सरकार और उत्तराखंड पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों की सुरक्षा और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर गहन मंथन किया जाएगा। सेमिनार को लेकर कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती ने आज वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानव तस्करी को रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पुलिस के साथ महिला एवं बाल विकास, श्रम, समाज कल्याण, अभियोजन सहित सभी संबंधित विभागों को एकजुट होकर काम करना होगा। इसी उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों और राज्यों के अधिकारियों को एक मंच पर लाया जा रहा है। पुलिस महानिरीक्षक के अनुसार सेमिनार में उत्तराखंड के अलावा पड़ोसी पांच राज्यों के अधिकारी भी प्रतिभाग करेंगे। इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, समाज कल्याण विभाग, अभियोजन विभाग और मानव तस्करी निरोधक इकाइयों के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। उत्तराखंड के सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, कुमाऊं, देहरादून और हरिद्वार परिक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के जवानों की भागीदारी भी रहेगी। कुल मिलाकर करीब 150 अधिकारियों और जवानों के इस महत्वपूर्ण आयोजन में शामिल होने की संभावना है। इससे मानव तस्करी के मामलों की पहचान, रोकथाम और पीड़ितों तक सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती ने कहा कि मानव तस्करी एक ऐसा अपराध है, जिसमें अपराधी अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों में सक्रिय रहते हैं। ऐसे में किसी एक विभाग या राज्य की कार्रवाई से इस अपराध के पूरे तंत्र पर प्रभावी रोक लगाना आसान नहीं है। इसके लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान से लेकर संयुक्त कार्रवाई तक सभी स्तरों पर बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा कि सेमिनार के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी अपने अनुभव साझा करेंगे और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। साथ ही पीड़ितों की पहचान, उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने, पुनर्वास और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि मानव तस्करी के विरुद्ध आगे की ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियों और उनके बीच समन्वय की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जागरूकता, सतर्कता और समय पर कार्रवाई के जरिए मानव तस्करी के मामलों को रोकने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। पंतनगर में होने वाला यह आयोजन इसी सामूहिक प्रयास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।