उत्तराखंड: इस बार एक पत्रकार बनेगा मुख्यमंत्री?पुष्कर सिंह धामी को मिलेगी ये बड़ी जिम्मेदारी? सीएम की कुर्सी की उठापटक में आया नया मोड़
उत्तराखंड में अभी तक सीएम पद पर पिक्चर क्लियर नही हो पाई है। कौन मुख्यमंत्री बनेगा इस पर अब भी मंथन जारी है। सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के मुताबिक बीजेपी हाईकमान इस बार उत्तराखंड में एक पत्रकार को सीएम की कुर्सी सौंपने जा रहा है। जी हां पत्रकार! दरअसल ये पहले पत्रकार ही थे बाद में बीजेपी से जुड़ गए। हम बात कर रहे है अनिल बलूनी की,जिन्होंने 26 साल की उम्र में राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा इससे पहले वो पत्रकारिता कर रहे थे और पत्रकारिता करते हुए ही अनिल राजनीति में सक्रिय रूप से संघ परिवार से भी जुड़ गए। संघ के प्रसिद्ध नेता सुंदर सिंह भंडारी और अनिल बलूनी की नजदीकियां बढ़ी। सुंदर सिंह भंडारी जब गुजरात के राज्यपाल बनकर आये तो उनके ओएसडी अनिल बलूनी ही बने थे। उसी दौरान अनिल बलूनी की नजदीकियां पीएम नरेंद्र मोदी से भी बढ़ने लगी,उस वक्त मोदी गुजरात के सीएम थे।

अनिल बलूनी का जन्म 2 दिसम्बर 1970 को पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उनके पिता पीतांबर दत्त बलूनी है,अनिल बलूनी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बिकॉम और पत्रकारिता की पढ़ाई की है।उनकी पत्नी दीप्ति जोशी है और उनके दो बच्चे है जिनमे एक बेटा और एक बेटी है।
2014 में जब अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तब अनिल बलूनी को पार्टी प्रवक्ता और मीडिया प्रकोष्ठ की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। यही वो समय था जब अनिल बलूनी ने अपनी निष्ठा और वफादारी से बीजेपी के दिग्गज नेताओं के बीच अपना भरोसा मजबूत किया।

अनिल बलूनी को 10 मार्च 2018 को भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड से राज्यसभा का सदस्य नामित किया है। वह कई कमेटियों के सदस्य हैं। बलूनी को शांत स्वभाव के नेताओं में गिना जाता है। बलूनी हर शब्द को नाप-तौलकर बोलने वाले व्यक्ति है,जैसा कि एक पत्रकार खासतौर पर करता है। पार्टी में भी उनकी अच्छी पकड़ है,साथ ही साथ वह उत्तराखंड के लोगों की नब्ज टटोलने में माहिर हैं। जिस वक्त उत्तराखंड में निशंक सरकार थी उस वक्त सरकार ने बलूनी को वन्यजीव बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया था। इस समय बलूनी राज्यसभा के सांसद है। वही पार्टी हाईकमान द्वारा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पुष्कर सिंह धामी के नाम पर मोहर लगाई जा सकती है।पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद के कुछ ही महीनों में ताबड़तोड़ बैटिंग कर पार्टी का भरोसा तो जीत ही लिया है,इसीलिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।