उत्तराखंड:एक नाम,156 आपत्तियां! SIR में ‘नितिन’ सबसे बड़ा आपत्ति वाला नाम!आखिर एक नाम पर इतनी आपत्तियां क्यों?
उत्तराखंड में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान सामने आए आंकड़े अब दिलचस्प होने लगे हैं। मतदाता सूची पर आपत्तियां तो हजारों की संख्या में पहुंच गई हैं, लेकिन इनमें कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके खिलाफ असाधारण रूप से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा ‘नितिन’ नाम की है। आंकड़ों के मुताबिक अब तक इस नाम से 156 आपत्तियां दर्ज की गई हैं। ये आपत्तियां जसपुर और किच्छा विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी बताई गई हैं।
यानी एक-दो नहीं, सीधे 156 आपत्तियां। अब सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर एक ही नाम इतनी बार आपत्ति के घेरे में कैसे आया? हालांकि सिर्फ नाम के बार-बार सामने आने से इसे फर्जी आपत्ति मान लेना सही नहीं होगा। एक नाम के कई अलग-अलग वास्तविक मतदाता भी हो सकते हैं। इसलिए अब असली तस्वीर सत्यापन के बाद ही साफ होगी।
‘नितिन’ के बाद कौन-कौन?
SIR के तहत अब तक प्रदेश में 12,209 वास्तविक आपत्ति आवेदन दर्ज किए गए हैं। इनमें ‘नितिन’ के बाद विनीत गिरि गोसाई नाम से 126, कार्तिक घीक से 125, अशोक प्रसाद से 113 और अभिषेक तिवारी के नाम से 104 आपत्तियां दर्ज हैं।
इसके अलावा लतिका सिकदार के नाम से 93, विजय यादव से 90, जयमहाशक्ति मिश्रा से 76, गुरमेल सिंह से 75 और रामकुमार के नाम से 73 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
इन टॉप-10 नामों से ही 1,124 आपत्तियां सामने आई हैं, जो कुल आपत्तियों का करीब 9.2 फीसदी है।

आपत्तियां भी कुछ इलाकों में सिमटीं
आंकड़ों का एक और दिलचस्प पहलू है। सबसे ज्यादा आपत्तियां उधम सिंह नगर के विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी हैं। जसपुर, किच्छा, काशीपुर, रुद्रपुर, बाजपुर, सितारगंज और गदरपुर को मिलाकर यहां 10,310 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
वहीं हरिद्वार जिले के रुड़की, मंगलौर और हरिद्वार ग्रामीण में 1,029 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
यानी इन 10 विधानसभा क्षेत्रों में ही 11,339 आपत्तियां सामने आई हैं। प्रदेश की कुल 12,209 आपत्तियों के मुकाबले यह करीब 93 फीसदी बैठती हैं। बाकी विधानसभा क्षेत्रों से लगभग 870 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
आखिर किस बात पर लग रही हैं इतनी आपत्तियां?
आपत्तियों के कारण भी कहानी का एक अहम हिस्सा हैं। सबसे ज्यादा 8,166 आपत्तियां ऐसे मतदाताओं के खिलाफ हैं, जिन्हें Absent/Permanently Shifted, यानी अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है।
इसके बाद 2,872 आपत्तियां ऐसे मामलों में हैं, जहां मतदाता का नाम पहले से दर्ज होने यानी Already Enrolled का आधार लिया गया है।
इसके अलावा 730 मामले Permanently Shifted, 286 मृतक मतदाताओं, 110 कम उम्र के मतदाताओं और दो मामलों में भारतीय नागरिक नहीं होने के आधार पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। 42 मामलों में आपत्ति का कारण स्पष्ट नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल: आपत्ति करने वाला और जिसके खिलाफ आपत्ति, दोनों का नाम एक!
आंकड़ों में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। 879 ऐसे आवेदन हैं, जिनमें आपत्ति दर्ज कराने वाले का नाम और जिस मतदाता के खिलाफ आपत्ति की गई है, उसका नाम एक ही है।
यह कुल आपत्तियों का करीब 7.2 फीसदी है।
अब इन आंकड़ों का मतलब क्या है, इसका फैसला आंकड़े नहीं बल्कि जांच करेगी। क्योंकि आपत्ति दर्ज होना किसी मतदाता का नाम सीधे वोटर लिस्ट से बाहर कर देना नहीं है।
अब नियम के मुताबिक आपत्ति करने वाले और जिसके खिलाफ आपत्ति दर्ज हुई है, दोनों को नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ERO दोनों पक्षों को सुनेंगे, दस्तावेजों और दावों की जांच करेंगे और फिर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
यानी SIR में फिलहाल सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वोटर लिस्ट में किसका नाम है। सवाल यह भी है कि एक ही नाम पर इतनी आपत्तियां आखिर क्यों आईं? इस सवाल का जवाब अब ERO की जांच से ही सामने आएगा।