ये क्याः एक नंबर, दो कारें और चेसिस भी एक! रुद्रपुर से सामने आया हैरान करने वाला मामला, आधार कार्ड में भी गड़बड़ी! ARTO कार्यालय में मचा हड़कंप
रुद्रपुर। संभागीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर वाली दो स्विफ्ट डिजायर कारें आमने-सामने खड़ी मिलीं। हैरानी की बात यह रही कि शुरुआती जांच में दोनों वाहनों का चेसिस नंबर भी हूबहू एक पाया गया। मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग के अधिकारियों ने दोनों वाहन मालिकों को कार्यालय बुलाकर वाहनों की जांच शुरू कर दी है। वहीं, दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान आधार कार्ड नंबर में भी समानता सामने आई, जबकि फोटो और जन्मतिथि अलग-अलग मिली। इससे पूरे मामले में दस्तावेजों के दुरुपयोग और वाहन की पहचान से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पूरा घटनाक्रम मंगलवार को सामने आया। मामला यूके-06 एएन-0807 नंबर की दो स्विफ्ट डिजायर कारों से जुड़ा है। एक वाहन ज्वालापुर, हरिद्वार निवासी सहदेव कुमार पाल पुत्र गोपाल सिंह के नाम पंजीकृत है, जबकि इसी नंबर की दूसरी कार नैनीताल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र के ग्राम धमोला निवासी नीरज कुमार पुत्र राजेंद्र के नाम दर्ज मिली। दोनों वाहन अलग-अलग लोगों के पास होने के बावजूद एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर से संचालित हो रहे थे। जानकारी के अनुसार ज्वालापुर निवासी सहदेव कुमार पाल मंगलवार को अधिवक्ता हेमंत प्रकाश के साथ एआरटीओ कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि उनके नाम पंजीकृत स्विफ्ट डिजायर कार का बीमा नवीनीकरण कराने के दौरान उन्हें पता चला कि इसी रजिस्ट्रेशन नंबर से दूसरी कार का बीमा भी किसी अन्य व्यक्ति के नाम चल रहा है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने अपने रिकॉर्ड की जांच की। रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि यूके-06 एएन-0807 नंबर की दूसरी स्विफ्ट डिजायर नैनीताल जिले के कालाढूंगी निवासी नीरज कुमार के नाम दर्ज है। इसके बाद विभाग ने नीरज कुमार को भी उनकी कार सहित एआरटीओ कार्यालय बुलाया। दोनों वाहन जब एआरटीओ कार्यालय में आमने-सामने खड़े किए गए तो मामला और पेचीदा हो गया। दोनों कारों का रजिस्ट्रेशन नंबर एक ही था। इसके बाद तकनीकी स्तर पर वाहनों की जांच की गई तो चेसिस नंबर भी समान पाया गया। एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर और एक ही चेसिस नंबर वाली दो अलग-अलग कारों के सामने आने से परिवहन विभाग के अधिकारी भी सकते में आ गए। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर दो अलग-अलग कारों पर एक ही वाहन की पहचान से जुड़े नंबर कैसे दर्ज हो गए।
आधार कार्ड ने बढ़ाया रहस्य
मामले की जांच के दौरान दस्तावेजों की पड़ताल की गई तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। नीरज कुमार ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने कार केलाखेड़ा के एक डीलर के माध्यम से खरीदी थी। डीलर ने वाहन के पूर्व मालिक से संबंधित जो दस्तावेज उपलब्ध कराए, उनमें सहदेव कुमार पाल के नाम का आधार कार्ड भी सामने आया। हालांकि, जांच में आधार नंबर सहदेव कुमार के नाम से ही जुड़ा पाया गया, लेकिन दस्तावेज में लगी फोटो और जन्मतिथि अलग-अलग थी। इससे यह आशंका और गहरा गई कि किसी स्तर पर पहचान संबंधी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया हो सकता है। अब परिवहन विभाग इस बिंदु को भी जांच के दायरे में लेकर चल रहा है।
कई बार ट्रांसफर हुआ वाहन, पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे
विभागीय जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि संबंधित वाहन पहले रुद्रपुर निवासी एक चिकित्सक के नाम पंजीकृत था। इसके बाद वाहन के अलग-अलग लोगों के नाम ट्रांसफर होने का रिकॉर्ड सामने आया है। ऐसे में परिवहन विभाग अब वाहन के पुराने पंजीकरण रिकॉर्ड, स्वामित्व हस्तांतरण के दस्तावेज, बिक्री से जुड़े कागजात और डीलर की भूमिका की भी जांच कर रहा है। जांच का दायरा केवल मौजूदा वाहन मालिकों तक सीमित नहीं है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वाहन का पूरा स्वामित्व इतिहास क्या रहा और किस स्तर पर एक ही वाहन की पहचान से जुड़े दस्तावेज दूसरी कार तक पहुंचे।
मारुति की तकनीकी टीम जुटी जांच में
मामले की तकनीकी पेचीदगी को देखते हुए स्थानीय मारुति एजेंसी की तकनीकी टीम की मदद ली जा रही है। टीम दोनों कारों की तकनीकी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दोनों में से वास्तविक वाहन कौन सा है और दूसरे वाहन के चेसिस नंबर में किसी स्तर पर छेड़छाड़ तो नहीं की गई। तकनीकी रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है कि वाहनों के मूल निर्माण संबंधी विवरण, चेसिस और अन्य पहचान चिह्नों में क्या अंतर है। परिवहन विभाग को अब मारुति की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है।
विभाग के सामने कई बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने परिवहन विभाग की वाहन पंजीकरण और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर दो अलग-अलग वाहनों का रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर एक ही पाया गया है तो यह गंभीर मामला है। जांच में यह भी पता लगाना होगा कि रिकॉर्ड में यह विसंगति किस स्तर पर हुई और क्या किसी ने जानबूझकर दस्तावेजों में हेरफेर की। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि एक ही नंबर से दोनों वाहनों का बीमा कैसे जारी हुआ और अलग.अलग लोगों के नाम वाहन संबंधी दस्तावेज कैसे तैयार हुए। यदि दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा या नंबर से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो मामले में संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।
एआरटीओ प्रशासन बोले-तकनीकी रिपोर्ट के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
एआरटीओ प्रशासन मोहित कोठारी ने बताया कि दोनों वाहनों की जांच कराई जा रही है। एक वाहन की पहचान सही पाए जाने की दिशा में जानकारी मिली है, जबकि दूसरे वाहन के चेसिस नंबर की विस्तृत तकनीकी जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मारुति कंपनी की तकनीकी रिपोर्ट और पुराने दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।