उत्तराखण्डः न राजस्व ग्राम का दर्जा, न योजनाओं का लाभ! तीन गांवों की पीड़ा पर हाईकोर्ट में सुनवाई, वन विभाग को चार सप्ताह में स्पष्ट जवाब देने के निर्देश

Uttarakhand: Neither revenue village status nor benefits from government schemes! High Court hears the plight of three villages; Forest Department directed to provide a clear response within four wee

नैनीताल। उत्तराखंड हाइकोर्ट में उधम सिंह नगर की जसपुर तहसील के तीन ग्राम शिपका, मिलख शिपका और मनोरारथपुर थर्ड को राजस्व ग्राम बनाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान वन विभाग द्वारा कोर्ट से विश्लेषण करने के लिए अतरिक्त समय की मांग की गई, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने वन विभाग को 4 सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 4 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। बता दें कि मनोरथपुर थर्ड निवासी मुख्यतियार सिंह व पंजाब सिंह ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि शिपका, मिलख शिपका व मनोरथ पुर थर्ड गांव की जमीन 1958 में तुमड़िया डैम बनने से साढ़े तीन सौ हैक्टेयर भूमि चली गयी थी। जिसके बाद इन गांवों को रिजर्व फारेस्ट की भूमि दे दी गयी। रिजर्व फारेस्ट की भूमि देने से अब ये गांव राजस्व ग्राम नही रहे। जिसके चलते यहां के ग्रामीणों सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिल रहा है। पूर्व में केंद्र सरकार ने इन गांवों को राजस्व ग्राम बनाने की अनुमति दी गई थी। बावजूद इसके आज तक इन्हें राजस्व ग्राम घोषित नही किया गया और सरकार ने यह परमिशन 2017 में वापस ले ली। याचिकर्ताओं द्वारा यह भी कहा गया कि इन तीनों गावों को राजस्व ग्राम घोषित किया जाय।