दर्दभरी दास्तानः 7 साल तक ससुराल में कैद, मारपीट और अपनों से बिछड़ने का दर्द! अब दो मासूम बच्चों के भविष्य के लिए डीएम से लगाई गुहार, चंपावत प्रशासन ने बढ़ाया मदद का हाथ
चंपावत। चंपावत जिले के लोहाघाट के मड़ गांव की रहने वाली विमला देवी को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। विमला देवी की कहानी काफी दुख भरी है। विमला देवी ने बताया जब वह 16/17 साल की थी उनकी बुआ की लड़की के द्वारा धोखे से उनके मां-बाप को गुमराह करते हुए उसकी शादी राजस्थान के भरतपुर निवासी राजवीर से करवा दी थी। विमला देवी ने बताया कि साल भर तक सब ठीक रहा। लेकिन उसके बाद उसके पति राजवीर के द्वारा उसके साथ बुरी तरह मारपीट करनी शुरू कर दी। तथा उसे 7 वर्षों तक ससुराल में कैद में कर रखा गया। उसे बाहर निकलने तथा परिजनों से बात करने तक की अनुमति नहीं थी। विमला ने बताया कि इस दौरान उसके दो बच्चे हुए। विमला ने कहा जब उनके पिता की मौत हुई तो ससुराल पक्ष के द्वारा अपने पिता की मौत की खबर तक नहीं दी गई। विमला ने बताया वह अपनी छोटी बहन व परिजनों की मदद से वह किसी तरह 2 वर्ष पूर्व अपने पति व ससुराल की कैद से छूटकर अपने मामा के घर मड़ गांव पहुंची। उन्होंने कहा उनकी एक पांच वर्षीय बेटी तथा 3 वर्ष का एक बेटा भी है। उसे अपने दो बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है और बच्चों के भविष्य के लिए वह संघर्ष कर रही है। बिमला ने बताया कि उसके बच्चों के कोई कागजात नहीं बने हैं। जिस कारण उसके बच्चों का स्कूल में दाखिला नहीं हो पा रहा है। सोमवार को जनता मिलन कार्यक्रम में अपनी समस्या को लेकर विमला ने डीएम मनीष कुमार से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद डीएम मनीष कुमार द्वारा विमला की समस्या का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए बाल विकास अधिकारी को तत्काल विमला के बच्चों के आधार कार्ड बनाने तथा बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र में दाखिला देने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देश पर विमला को अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ दिया जाएगा। समस्या का संज्ञान लेने के लिए विमला द्वारा जिलाधिकारी को धन्यवाद दिया गया। विमला मूल रूप से दिगालीचौड़ क्षेत्र के टाकना गांव की रहने वाली है। फिलहाल विमला अपने भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रही है।