उत्तराखण्डः हरिद्वार में संतों का बड़ा समागम! ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का समर्थन, साधु-संतों से मांगे सुझाव
हरिद्वार। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर हरिद्वार में रविवार को बड़ा संत समागम आयोजित किया गया। समागम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत भाजपा के कई नेता और बड़ी संख्या में साधु-संत शामिल हुए। कार्यक्रम में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर संत समाज के साथ विस्तार से चर्चा की गई और उनके सुझाव मांगे गए। साधु-संतों ने भी एक राष्ट्र-एक चुनाव व्यवस्था का समर्थन करते हुए इसे देश के विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। समागम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज, महामंत्री हरि गिरी महाराज, निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष ज्ञानदेव महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता करौली शंकर महाराज, दाती महाराज, साध्वी प्राची और महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज समेत कई संत मौजूद रहे। योग गुरु स्वामी रामदेव ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए कहा कि देश में सालभर किसी न किसी हिस्से में चुनाव होते रहते हैं। इसका सीधा असर प्रशासनिक व्यवस्था, विकास योजनाओं और शिक्षा तंत्र पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और अध्यापकों का काफी समय चुनाव ड्यूटी में चला जाता है। यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव हों तो शिक्षकों का समय बचेगा और वे बच्चों की शिक्षा पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
बाबा रामदेव ने कहा कि चुनावों की लगातार प्रक्रिया से विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था से समय और संसाधनों की बचत हो सकती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, अर्थव्यवस्था, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सुधार के लिए भी लगातार और प्रभावी ढंग से काम करने की जरूरत है। स्वामी रामदेव ने कहा कि कुछ राजनेताओं को आशंका है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू होने से अलग-अलग राज्यों में उनकी राजनीतिक संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश के मतदाताओं को समझदार मानना चाहिए और राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सभी संतों ने तय किया है कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की बात देश के दूर-दराज तक पहुंचाई जानी चाहिए। उनके अनुसार इससे देश विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ सकता है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है। बाबा रामदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से चुनाव सुधार की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और देशहित को प्राथमिकता देने की अपील की। समागम में स्वामी रामदेव ने सामाजिक समानता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में किसान, युवा, ब्राह्मण, दलित या किसी भी वर्ग के साथ अन्याय होता है तो उसके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय या वर्ग को अपमानित करना गलत है और समाज में भेद की दीवारें खड़ी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल भी उचित नहीं है। समाज में विभाजन पैदा करने की प्रवृत्ति को समाप्त करने की जरूरत है। रामदेव ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि भारत माता को भारतीय संस्कृति और परंपरा के व्यापक संदर्भ में समझना चाहिए।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज ने भी ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद शुरुआती दशकों में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव काफी हद तक एक साथ होते थे, लेकिन बाद में अलग-अलग चुनावों की परंपरा बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि समय के साथ विभिन्न परिस्थितियों में विधानसभाओं के कार्यकाल और चुनाव चक्र में बदलाव आया, जिसके चलते देश में लगातार चुनाव होने लगे। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार की ओर से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की पहल की गई है। श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज ने कहा कि संत समाज देशहित से जुड़े इस विषय पर एकमत है और सभी साधु-संतों ने एक देश, एक चुनाव व्यवस्था का समर्थन किया है। हरिद्वार में आयोजित इस समागम को ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के पक्ष में संत समाज की राय सामने लाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संतों से संवाद कर इस व्यवस्था को लेकर उनके विचार और सुझाव सुने। संतों ने चुनावों की बार-बार होने वाली प्रक्रिया से होने वाले खर्च, प्रशासनिक व्यस्तता और विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया।