उत्तराखण्डः उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला! हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने मांगा तीन सप्ताह का समय
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में वर्षो से लगे उपनल संविदा कर्मचारियों को आदेश होने के बाद भी सरकार द्वारा नियमित नही क़रने और उन्हें चयनित वेतनमान नही दिये जाने तथा उनको दिए गए वेतन से जीएसटी काटे जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। आज हुए सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने पर सचिव कार्मिक, सचिव वित्त, सचिव सैनिक कल्याण बोर्ड व राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रह सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने अपना पक्ष रखा। यह भी कहा की, कि वे इस केस में पहली दफा पेश हो रहे हैं, उन्हें मौका दिया जाय। जिसपर कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। बता दें कि 1 वर्ष से प्रदेश सरकार द्वारा कोर्ट के आदेश का पालन न कर कोर्ट से सरकार द्वारा बार-बार अतिरिक्त समय की मांग की जा रही है जिसे लेकर प्रदेश भर के उपनल कर्मियों द्वारा में आक्रोश है। उपनल द्वारा उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर कर कहा गया है कि 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में नियमितीकरण का आदेश दिया था। जिसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को 2024 में झटका और संविदा कर्मचारियों के हक में फैसला दिया था। जब हाईकोर्ट में इस पूरे मामले में अवमानना याचिका दाखिल हुई तो सरकार पिछले 1 साल से इसको लटकाती रही है।