उत्तराखण्डः प्लास्टिक से निर्मित कचरे के निस्तारण का मामला! भारी भरकम धनराशि खर्च कर उपकरण खरीदने के बावजूद नहीं सुधरे हालात! हाईकोर्ट ने अधिकारियों से मांगा शपथ पत्र

Uttarakhand: Issue regarding the disposal of plastic waste! Situation remains unimproved despite spending a massive amount on purchasing equipment! High Court seeks an affidavit from officials.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्लास्टिक से निर्मित कचरे का निस्तारण सही तरीके से न किए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खण्डपीठ ने डायरेक्टर पंचायतीराज व डायरेक्टर अर्बन डवलपमेंट से शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने को कहा है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के क्रम में सिंगल यूज प्लास्टिक व प्लास्टिक मैनेजमेंट के मामले में उनके द्वारा क्या उपाय किए गए हैं। कोर्ट की खंडपीठ ने चीफ सेक्रेटरी से कहा है कि प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और कूड़ा निस्तारण के लिए एक जागरूकता अभियान चलाने पर विचार किया जाए। जिसमें स्कूली बच्चों, गणमान्य नागरिकों, न्यायायिक प्रकिया से जुड़े लोगों को शामिल किया जाए। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 6 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। आज हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि प्लास्टिक निर्मित कचरे के निस्तारण के लिए भारी भरकम धनराशि खर्च कर उपकरण खरीदे गए, बावजूद इसके अभी भी कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कचरे के ढे़र लगे हुए हैं। बता दें कि अल्मोड़ा हवलबाग निवासी जितेंद्र यादव ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार ने 2013 में बने प्लास्टिक यूज व उसके निस्तारण करने के लिए नियमावली बनाई गई थी। परन्तु इन नियमों का पालन नही किया जा रहा है। 2018 में केंद्र सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स बनाए गए थे जिसमें उत्पादकर्ता, परिवहनकर्ता व बिक्रेताओं को जिम्मेदारी दी थी कि वे जितना प्लास्टिक निर्मित माल बेचेंगे उतना ही खाली प्लास्टिक को वापस ले जाएंगे। अगर नही ले जाते हैं तो सम्बंधित नगर निगम, नगर पालिका व अन्य फण्ड देंगे, जिससे कि वे इसका निस्तारण कर सकें। परन्तु उत्तराखंड में इसका उल्लंघन किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक के ढेर लगे हुए है और इसका निस्तारण भी नही किया जा रहा है।