उत्तराखण्डः जागेश्वर मंदिर में ट्रस्ट गठन को लेकर सरकार की अनदेखी पर हाईकोर्ट नाराज! 12 साल पुराने आदेश के अनुपालन पर मांगा जवाब

Uttarakhand: High Court displeases government over negligence regarding the formation of a trust at Jageshwar Temple; demands response on compliance with a 12-year-old order

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जागेश्वर मंदिर के रखरखाव व उसकी देखरेख के लिए मंदिर समिति बनाये जाने के संबंध में पूर्व में दिए गए आदेश का अभी तक अनुपालन नहीं करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले कि सुनवाई के बाद न्यायमूर्ती रविंद्र मैथाणी व न्यायमूर्ती आलोक महरा कि खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि पूर्व में दिए गए आदेश का अनुपालन अभी तक क्यों नही हुआ। इसपर 30 दिसंबर तक स्थिति से अवगत  कराएं। मामले कि अगली सुनवाई हेतु 30 दिसंबर कि तिथि नीयत की गई है। मामले के अनुसार जागेश्वर निवासी रमेश चंद्र जोशी ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि वर्ष 2013 में उच्च न्यायालय ने जागेश्वर मंदिर के रखरखाव व अन्य के संबंध में स्वतः संज्ञान लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया था। जिसमें कहा गया था मंदिर की देखरेख के लिए एक कमेटी गठित हो, एक सदस्य सर्वे ऑफ इंडिया का हो, कमेटी में दस सदस्य स्थानीय हो। जिनमें से एक सदस्य को राज्यपाल मैनेजर नियुक्त करेंगे। बाकि सदस्य उस कमेटी के सदस्य रहेंगे। लेकिन 12 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक न तो कमेटी का गठन हुआ, न ही आदेश का अनुपालन। मंदिर के हालात जस की तस बने हुए हैं। मंदिर की देखरेख नही हो पा रही है, मंदिर में चढ़ाए जाने वाला चढ़ावे का कोई रिकार्ड नही है। मंदिर के पुजारियों की अपनी-अपनी मनमानी चल रही है। जब याचिकाकर्ता ने उनसे इसकी आरटीआई की प्रति मांगी गई तो उनके द्वारा कहा गया कि हम आरटीआई देने के लिए बाध्य नही हैं, क्योंकि हम एक निजी संस्था हैं। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि पूर्व के आदेशों का अनुपालन करवाया जाए और चढावे व दान का ऑडिट करवाया जाए।