उत्तराखंडः रामनगर के पापड़ी-सीतापुर स्टोन क्रशर यूनिट पर फिलहाल जारी रहेगी रोक! हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दो हफ्ते में निर्णय लेने के दिए निर्देश

Uttarakhand: The ban on the Papadi-Sitapur stone crusher unit in Ramnagar will remain in place for the time being! The High Court has directed the Pollution Control Board to make a decision within tw

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामनगर के पापड़ी सीतापुर में स्थापित स्टोन क्रशर यूनिट के संचालन पर लगी रोक को फिलहाल जारी रखते हुए याचिकाकर्ता से अपनी आपत्ति प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष देने को कहा है। जिस पर पीसीबी को दो हफ्ते के भीतर निर्णय लेना होगा। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सतनाम सिंह की याचिका की सुनवाई के बाद पूर्व में रामनगर तहसील के ग्राम पापड़ी एवं सीतापुर टांडा, जनपद नैनीताल में प्रस्तावित पत्थर क्रशर यूनिट के निर्माण पर रोक लगाई थी। याचिका में यह भी कहा गया कि सिंचाई विभाग, रामनगर द्वारा 27 दिसंबर 2022 को जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। इसी आधार पीसीबी द्वारा उद्योग स्थापना की अनुमति प्रदान की गई थी। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य भी आया कि इससे पूर्व इसी विषय से संबंधित एक अन्य जनहित याचिका भी विचाराधीन रह चुकी है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निरीक्षण कर नौ कमियां चिन्हित की थीं। निजी कंपनी की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि पूर्व याचिका के अनुपालन में कमियों को दूर करने के लिए समय दिया गया था, किंतु वर्तमान याचिका में पारित यथास्थिति आदेश के कारण निर्माण कार्य रुक गया और कमियों को दूर करने की प्रक्रिया बाधित हो गई। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि वर्तमान याचिका में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया। खंडपीठ ने माना कि यदि एनओसी की शर्तों के उल्लंघन का आरोप है तो उसकी तथ्यात्मक जांच आवश्यक होगी और इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक आवश्यक पक्ष है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत आपत्ति प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि आपत्ति प्राप्त होने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले। तीन सप्ताह तक यथास्थिति आदेश प्रभावी रहेगा। यदि शिकायत निराधार पाई जाती है तो निजी कंपनी को पूर्व में दी गई स्थापना अनुमति के आधार पर निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की छूट होगी, जबकि शिकायत सही पाए जाने पर आगे का निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया गया।