उत्तराखंड HC:क्या पुलिस सड़क पर दे सकती है सजा?लाठी, सार्वजनिक पिटाई और वायरल वीडियो, हाईकोर्ट पहुंचा पूरा मामला,पुलिस के लिए सख्त SOP और नई गाइडलाइन की मांग
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्तियों के साथ कथित सार्वजनिक मारपीट, सार्वजनिक रूप से परेड कराने तथा उनके नाम, फोटो और वीडियो आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाने जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। यह याचिका नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें राज्य सरकार, प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक (DGP) तथा पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि हाल के वर्षों में पुलिस द्वारा आरोपित या गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक पिटाई, सार्वजनिक परेड, मीडिया के सामने पेश करने तथा उनके फोटो और वीडियो प्रसारित करने की घटनाएं बढ़ी हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों तथा निर्दोष माने जाने के सिद्धांत के विपरीत है।
अधिवक्ता प्रभा नैथानी ने बताया कि याचिका में विशेष रूप से 28 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए उन वीडियो का उल्लेख किया गया है, जिनमें उत्तराखंड पुलिस के कुछ कर्मियों द्वारा सार्वजनिक सड़क पर लोगों को लाठी-डंडों से पीटते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया है। याचिका के अनुसार, इसी घटना से जुड़े एक अन्य वीडियो में कथित रूप से आरोपितों को सड़क पर घसीटने और जिंदा जलाने जैसी बातें भी कही गईं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया के बजाय सार्वजनिक प्रतिशोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलने की आशंका जताई गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस घटना के बाद 28 जुलाई 2026 को पुलिस महानिदेशक को विस्तृत प्रतिनिधित्व भेजकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे राज्य के लिए पुलिस बल के प्रयोग, गिरफ्तार व्यक्तियों के सम्मान, मीडिया से संवाद तथा फोटो-वीडियो जारी करने संबंधी एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने की मांग की गई थी। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई व्यापक राज्यव्यापी नीति लागू नहीं की गई, जिसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के इस्लाम खान बनाम राज्य राजस्थान मामले के निर्णय का भी हवाला दिया गया है। दावा किया गया है कि उस फैसले के बाद राजस्थान में गिरफ्तार व्यक्तियों के साथ व्यवहार को लेकर विस्तृत SOP लागू की गई थी और उत्तराखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू किए जाने की आवश्यकता है।
जनहित याचिका में हाईकोर्ट से राज्य सरकार और पुलिस विभाग को गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक पिटाई, सार्वजनिक अपमान, मीडिया ट्रायल तथा आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान उजागर करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही गिरफ्तारी, हिरासत, बल प्रयोग, मीडिया से संवाद और जवाबदेही तय करने के लिए राज्यव्यापी SOP तैयार करने तथा पहले से आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आरोपितों के फोटो, वीडियो और पहचान संबंधी सामग्री की समीक्षा कर आवश्यक होने पर हटाने या पहचान छिपाने के निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है।