Sep 15, 2026 Login

उत्तराखण्डः अल्मोड़ा में ऐतिहासिक नंदादेवी मेले का भव्य आगाज! गणेश पूजन के साथ शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान, उमड़ा आस्था का सैलाब

Uttarakhand: Grand commencement of the historic Nanda Devi Fair in Almora! Religious rituals began with the worship of Lord Ganesha, drawing a massive surge of devotees.

अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में कुमाऊं के प्रसिद्ध ऐतिहासिक नंदादेवी मेले का मंगलवार को भव्य और विधिवत शुभारंभ हो गया। नंदादेवी मंदिर में पारंपरिक गणेश पूजन के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। इसके बाद शहर में निकाली गई भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा ने पूरे अल्मोड़ा को आस्था, लोकसंस्कृति और कुमाऊंनी परंपराओं के रंग में रंग दिया। शोभायात्रा में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के साथ सांस्कृतिक दलों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मंगलवार को राजा आनंद सिंह राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के समीप से छात्र-छात्राओं का कारवां एकत्र हुआ। यहां से शोभायात्रा माल रोड, थाना बाजार, गंगोली मोहल्ला, जौहरी बाजार और चौक बाजार होते हुए लाला बाजार के रास्ते नंदादेवी मंदिर परिसर पहुंची। पारंपरिक कुमाऊंनी परिधानों में सजे बच्चे नाचते-गाते और मां नंदा-सुनंदा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। ढोल-दमाऊं और लोकधुनों के बीच निकली शोभायात्रा को देखने के लिए जगह-जगह लोगों की भीड़ जुटी रही। नंदादेवी मंदिर परिसर पहुंचने के बाद विभिन्न विद्यालयों के बीच रंगारंग सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। छात्र-छात्राओं ने मां नंदादेवी की आकर्षक झांकियां सजाईं। इसके अलावा कुमाऊंनी लोकनृत्य, पारंपरिक लोकगीत और प्रेरणादायक नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक पेश की। बच्चों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा। आयोजन को देखने के लिए स्थानीय नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी मंदिर परिसर पहुंचे। मेले के मुख्य संयोजक तारा चंद्र जोशी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि नंदादेवी मेले के धार्मिक आयोजनों का क्रम आने वाले दिनों में और भव्य रूप लेगा। 17 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति निर्माण के लिए पारंपरिक कदली यानी केले के वृक्षों को आमंत्रित करने की रस्म निभाई जाएगी। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कदली वृक्षों का चयन किया जाएगा। 18 सितंबर, सप्तमी के दिन सुबह भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके माध्यम से कदली वृक्षों को लक्ष्मेश्वर से नंदादेवी मंदिर परिसर लाया जाएगा। इसके बाद इन्हीं से मां नंदा-सुनंदा की भव्य मूर्तियों का निर्माण किया जाएगा। 19 सितंबर, अष्टमी की रात मां नंदा की विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होंगे। वहीं 23 सितंबर को मेले के अंतिम दिन मां नंदादेवी के डोले की विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। डोले की शोभायात्रा के साथ ही ऐतिहासिक मेले का विधिवत समापन होगा। मेले के दौरान प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी जारी रहेगा।