नैनीताल के डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान, ‘राजभाषा गौरव’ पुरस्कार से नवाजा
नवी मुंबई/नैनीताल। नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और कुमाऊं विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश रंजन तिवारी ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से नवी मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में डॉ. तिवारी को प्रतिष्ठित ‘राजभाषा गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। डॉ. तिवारी को यह राष्ट्रीय सम्मान उनकी चर्चित पुस्तक ‘अतीत से वर्तमान तक : नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा’ के लिए दिया गया। पुस्तक में नैनीताल के इतिहास, यहां के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास, राजभवन के निर्माण और उसकी विशिष्ट वास्तुकला को शोधपरक तरीके से दर्ज किया गया है। एक तरह से यह पुस्तक नैनीताल की ऐतिहासिक विरासत को दस्तावेज के रूप में सहेजने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में देशभर के 13 लेखकों को राजभाषा गौरव पुरस्कार के लिए चुना गया। इनमें उत्तराखंड से सम्मान पाने वाले डॉ. गिरीश रंजन तिवारी एकमात्र लेखक और उत्तराखंड से इस सम्मान से अलंकृत होने वाले पहले पत्रकार हैं। पुरस्कार के रूप में उन्हें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। नवी मुंबई के सिडको एग्जीबिशन सेंटर में आयोजित समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। डॉ. तिवारी को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बंडी संजय कुमार ने पुरस्कार प्रदान किया। समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं सुनेत्रा पवार सहित केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या ने किया। पुरस्कार समारोह में अमित शाह ने सम्मानित लेखकों को बधाई देते हुए हिंदी के प्रचार-प्रसार और लेखन के क्षेत्र में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन के दौरान राजभाषा विभाग, डीआरडीओ समेत विभिन्न संस्थानों के प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया गया।
विदेशों में भी हिंदी लेखन के लिए मिल चुके हैं सम्मान
डॉ. गिरीश रंजन तिवारी का हिंदी पत्रकारिता और लेखन से लंबा जुड़ाव रहा है। हिंदी लेखन एवं भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए उन्हें अमेरिका, हंगरी और मॉरीशस स्थित भारतीय दूतावासों के साथ ही थाईलैंड, सिंगापुर तथा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों की ओर से भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. तिवारी पत्रकारिता विषय पर तीन पुस्तकों के लेखक हैं। उनकी एक पुस्तक का विमोचन मॉरीशस के राष्ट्रपति ने वहां राष्ट्रपति भवन में किया था। उनके दो दर्जन से अधिक शोध पत्र और एक हजार से ज्यादा लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें उत्तराखंड रत्न, राज्य सूचना आयोग का आरटीआई अवार्ड और अंतर्राष्ट्रीय भारत सम्मान अचीवर्स अवार्ड समेत कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।
उत्तराखंड के लिए भी गौरव का क्षण
डॉ. तिवारी के चयन की घोषणा के बाद उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जन. (सेनि.) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने उन्हें बधाई दी थी। उन्होंने डॉ. तिवारी की उपलब्धि को उत्तराखंड के लिए गौरव बताते हुए कहा था कि ज्ञान, इतिहास और विरासत को शब्दों में सहेजकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में आठ लाख शब्द, 2029 तक विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश बनाने का लक्ष्य
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में अब करीब आठ लाख शब्द शामिल हो चुके हैं। इसमें विभिन्न भारतीय भाषाओं के 50 हजार से अधिक स्थानीय शब्दों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे हिंदी अधिक समृद्ध और लचीली बनी है तथा लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश बने। सम्मेलन में ‘भारती-बहुभाषी अनुवाद सारथी’ ऐप और भारतीय भाषाओं को समर्पित ‘भाषा कुंज’ डेटा सेंटर का लोकार्पण किया गया। हिंदी शब्द संसाधन, टंकण एवं आशुलिपि प्रशिक्षण की शुरुआत भी की गई।
राजभाषा कीर्ति पुरस्कार से संस्थानों का सम्मान
हिंदी में उल्लेखनीय कार्य के लिए राजभाषा कीर्ति पुरस्कार से पंजाब नेशनल बैंक, प्रवर्तन निदेशालय, यूनियन बैंक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, नाबार्ड, इंडियन ओवरसीज बैंक, भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, केंद्रीय विद्यालय संगठन, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, रक्षा मंत्रालय, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, हडको और एचपीसीएल समेत विभिन्न संस्थानों को सम्मानित किया गया। सम्मेलन में प्रशासन, बैंकिंग, विज्ञान, तकनीक, साहित्य और हिंदी भाषा से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इनमें कथाकार नीलेश मिसरा, पार्श्व गायक हरिहरन, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रो. हितेंद्र मिश्र समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल रहे।