Sep 15, 2026 Login

नैनीतालः दूषित पानी से बीमारी और मौतों पर हाईकोर्ट सख्त! जल संस्थान की ‘क्लीन’ रिपोर्ट पर उठे सवाल, 10 सैंपलों में मिला प्रदूषण! मुख्य सचिव को दिए अहम निर्देश

Nainital: High Court takes a tough stance on illnesses and deaths caused by contaminated water! Questions raised over the Jal Sansthan’s ‘clean’ report; contamination found in 10 samples! Key directi

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल के ज्यूलिकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से सैकड़ों लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने और दो मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से अगले सप्ताह तक एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। वहीं अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी खत्म करने से साफ इनकार करते हुए इसे जारी रखा है। कोर्ट ने जल संस्थान, जल निगम, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी गठित समिति में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी। मामले की सुनवाई के दौरान जल संस्थान की ओर से पानी की जांच रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी गई, जिसमें पानी की गुणवत्ता ठीक बताई गई थी। वहीं कोर्ट के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी पीसीबी की ओर से प्रभावित क्षेत्रों से लिए गए 20 से अधिक सैंपलों में से 10 की रिपोर्ट अब सामने आई है। इन सभी सैंपलों में पानी दूषित पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में भी पांच सैंपल लिए गए थे, जिनमें से चार सैंपल फेल पाए गए। रिपोर्ट सामने आने के बाद कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि दूषित पानी से बीमारी फैलने की स्थिति में अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। जिलाधिकारी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले में एक समिति गठित की गई है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की जानकारी मांगी। बाद में समिति में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी शामिल करने की बात कही गई। कोर्ट ने मुख्य सचिव को पूरे मामले को देखने और अगले सप्ताह तक एफिडेविट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पीसीबी को प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा फ्रेश सैंपल लेने को कहा गया है। सीएमओ की ओर से प्रभावित परिवारों के संबंध में भी अलग एफिडेविट दाखिल किया जाएगा। बता दें कि अधिवक्ता और याचिकाकर्ता रवि बिष्ट की जनहित याचिका पर आठ सितंबर को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले पर गहरी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था, तुमने बीमारी दी है, तुम ही इलाज कराओ। अब मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।